֍:2009 से कांगड़ा में बंदरों का आतंक§ֆ:मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 2009 से ही बंदरों का आंतक जारी है. जिसको लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में बंदरों की नसलबंदी को लेकर अभियान चलाया गया था. बाद में इस अभियान को रोका गया और ये काम वन विभाग को सौंप दिया. §֍:बंदरों के आतंक को लेकर सरकार ने शुरु की सब्सिडी§ֆ:बंदर और पशुओं से फसल खराब होने के खतरे को लेकर सरकार की ओर से सब्सिडी शुरु की गई. जिसमें फसल की सुरक्षा के लिए कंपोजिट और चेन लिंक बाड़ लगाने के लिए सरकार की ओर से 70 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है. इसका लाभ लेने के लिए किसान को विभाग के पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. §हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में किसान बंदरों के आतंक से परेशान हो गए हैं. कांगड़ा में मक्का की खेती करने वाले कई किसानों ने अपने खेत तक खाली छोड़ दिए हैं. बता दें कि बंदरों ने खेत में लगी मक्के की फसल को बर्बाद कर दिया है.ऐसे में किसानों ने मक्के की फसल ही छौड़ दी है और अन्य फसलें जैसे चारा उगा रहे हैं. एक रिपोर्ट में बताया गया कि बंदरों ने अभी तक लगभग 4,000 एकड़ की जमीन में कब्जा कर आतंक मचा दिया है. बंदरों का ये आतंक पिछले दो सालों से जारी है, जिसको लेकर प्रशासन ने भी अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है.

