֍:रोकथाम के लिए क्या करें ?
§ֆ:मानसून जैसे मौसम में पशु को बीमार होने से रोकने के लिए उसके स्थान पर गीला न होने दें. साथ ही पशु को समय समय पर साफ करें और स्वच्छ पानी और हरे चारे का सेवन कराएं. ऐसे में पशु को पौष्टिक आहार मिलेगा और किसी बीमारी का खतरा नहीं रहेगा. कई पशु पालक अपने जानवरों के लिए कपड़े बनवाते हैं, ताकि उनके पशु को सर्दी लगने का खतरा न हो. बारिश के मौसम में पशु को सूखे साफ झूल से बांधे और ध्यान रखें की पशु उसे गीला न करें. गीला होने पर झूल बदल लें.
§֍:सर्दी में करें ये काम
§ֆ:सर्दी के मौसम में पशु को उचित गर्मी देनी चाहिए, जिससे पशु को बीमारी का खतरा न हो और उसे ठंड भी न लगे. सर्दी के दौरान पशु से कुछ दूरी पर आग जला लें, जिससे पशु को गर्मी मिलती रहेगी. इस मौसम में ध्यान रखें की पशु के ऊपर छत हो या कुछ ढका हो जिससे कोहरा पशु पर न पड़े. इसके बाद पशु को साफ पानी और हरे चारे से सेवन कराकर सूखे जमीन पर ही बैठाएं. इससे बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. साथ ही पशु का टीकाकरण जल्द से जल्द पशु चिकित्सा केंद्र में जाकर लगवा लें.
§मौसम के बदलाव से जानवरों की तबियत बिगड़ जाती है. इस दौरान पशु पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है. इस समय पर जानवरों की देखभाल करना अति आवश्यत है, नहीं तो पशु की मृत्यु भी हो सकती है. मानसून के सीजन में पशु को अक्सर कम चारा खाते हुए देखा होगा. ऐसा मौसम के बदलाव से होता है. मानसून में जानवरों को कीड़े की बीमारी , जुखाम, बुखार हो जाता है. इसकी रोकथाम के लिए बीमार पशु को जल्द से जल्द पशु चिकित्सक के पास ले जाना जरूरी है. जिसके बाद बीमार पशु पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है.

