֍:नई तकनीक से किसानों को होगा फायदा §ֆ:खेती के लिए लेबर और पानी की काफी जरूरत होती है. साथ ही ट्रैक्टर के अलावा अन्य मशीनरी में डीजल की भी काफी खपत होती है और हमारा वातावरण भी प्रभावित होता है. DSR विधि को अपनाने से कम खर्च में काफी फायदा होगा.
§֍:डीएसआर विधि यानी सीधी बुआई क्या है?§ֆ:DSR का फूल फॉर्म डायरेक्ट सिडेड राइस है, यानी धान की सीधी बुआई विधि. इस विधि में किसान सीड्रिल से सीधी बुआई करते हैं. परंपरागत विधि में इस विधि की अपेक्षा दो गुना खर्च होता है. क्योंकि उसमें पहले खेतों में धान की फसल लगाने के लिए खेत को बराबर करना, लगातार पानी लगाना, पलेवा करना, फिर धान की बुआई. इसमें केवल नमी यानी पानी की कम मात्रा में भी फसल का अच्छा उत्पादन कर सकते हैं.
इस विधि में सबसे पहले हम बीज की व्यवस्था करते हैं, बीज भी ऐसा चयन करें जिसमें धान की बुआई के बाद 100 से 110 दिन में धान पक जाए. इसमें प्रति हेक्टयर 40 से 50 किलोग्राम धान लगता है. सीड्रिल के माध्यम से जून के अंत सप्ताह में जुलाई के पहले सप्ताह तक इसकी सीधी बुआई कर सकते हैं. इस विधि में ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि बुआई के समय 25cm की दूरी पर लाइनों में बुआई करना चाहिए. गैर कृषि क्षेत्रों में पानी की उपभोगता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, इसलिए इस विधि का उपयोग करके अच्छी फसल पैदा कर सकते हैं.
§ֆ:§֍:किसानों को क्या होगा फायदा§ֆ:1 श्रम यानी मेहनत की बचत होती है.
2.फसल बुवाई कम समय में की जा सकती है.
3.फसल 7 से 10 दिन पहले पक जाती है, जिससे अगली फसल की बुवाई समय पर की जा सकती है.
4 जल की उपभोगता कम होता है.
5.जुताई बुवाई का खर्च कम आता है, जिससे ईंधन की भी बचत होती है.
6. पंक्ति में बुवाई करने से यांत्रिक विधि से खरपतवार नियंत्रण करने में सुविधा होती है.
7. पौध सुरक्षा उपचार भी सुगमता पूर्वक किये जा सकते हैं.
8. धान की फसल से निकलने वाली मीथेन गैस जो ज्यादा निकलती है,
§उत्तर प्रदेश के बांदा में कृषि विभाग ने किसानों को एक नई तकनीकी से फसल की बुआई करने की अपील की है. कृषि अधिकारी का कहना है कि इस विधि से बुआई करने पर कम खर्च और कम पानी में अच्छी पैदावार की जा सकती है. जिला कृषि अधिकारी डॉक्टर प्रमोद कुमार ने बताया है कि इन दिनों खरीफ की बुआई का समय चल रहा है. बुंदेलखंड क्षेत्र में किसान धान की खेती सीधी बुवाई विधि (डीएसआर) से करनी चाहिए.

