ֆ:आईपीईएफ के सदस्य देशों ने आज इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो 21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान करने और एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए अपनी तरह के पहले दृष्टिकोण हैं। भारत ने हस्ताक्षर की कार्यवाही और मंत्रिस्तरीय विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया। हालांकि, भारत ने इन समझौतों पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि घरेलू अनुमोदन प्रक्रियाएं अब भी चल रही हैं जो नई सरकार के गठन के बाद पूरी होंगी। ये समझौते कम से कम पांच आईपीईएफ सदस्य देशों द्वारा अनुसमर्थन, स्वीकृति या अनुमोदन के लिए अपनी आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद लागू होंगे।
§ֆ:इस अवसर पर अपने संबोधन में सचिव श्री बर्थवाल ने आपूर्ति श्रृंखला समझौते के तहत तीन सहकारी निकायों की स्थापना, स्वच्छ अर्थव्यवस्था समझौते के तहत सहकारी कार्य कार्यक्रम और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था समझौते के तहत सहकारी गतिविधियों पर की गई पर्याप्त प्रगति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत का लक्ष्य अपनी कुशल श्रमशक्ति, प्राकृतिक संसाधनों और नीतिगत समर्थन के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनना है। सरकार समाधान खोजने और विविध तथा पूर्वानुमानित आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी सुनिश्चित करने में सक्रिय पहल कर रही है।
§ֆ:स्वच्छ अर्थव्यवस्था पर समझौते का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और संक्रमण, जलवायु लचीलापन और अनुकूलन, जीएचजी उत्सर्जन शमन की दिशा में आईपीईएफ के सदस्य देशों के प्रयासों में तेजी लाना; जीवाश्म ईंधन ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के नए तरीके खोजना/विकसित करना; तकनीकी सहयोग, कार्यबल विकास, क्षमता निर्माण और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना; और स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास, पहुंच और तैनाती को सुविधाजनक बनाने के लिए सहयोग करना है। यह समझौता निवेश, रियायती वित्तपोषण, संयुक्त सहयोगी परियोजनाओं, कार्यबल विकास और उद्योगों, विशेष रूप से एमएसएमई के लिए तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण की सुविधा प्रदान करेगा, ताकि भारतीय कंपनियों को मूल्य श्रृंखलाओं, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में और अधिक एकीकृत किया जा सके। ये सहकारी गतिविधियां सहकारी कार्य कार्यक्रमों और आईपीईएफ उत्प्रेरक पूंजी कोष जैसे संयुक्त सहयोगी कार्यों के माध्यम से की जाएंगी।
§ֆ:स्वच्छ अर्थव्यवस्था पर समझौते का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा और संक्रमण, जलवायु लचीलापन और अनुकूलन, जीएचजी उत्सर्जन शमन की दिशा में आईपीईएफ के सदस्य देशों के प्रयासों में तेजी लाना; जीवाश्म ईंधन ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के नए तरीके खोजना/विकसित करना; तकनीकी सहयोग, कार्यबल विकास, क्षमता निर्माण और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना; और स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास, पहुंच और तैनाती को सुविधाजनक बनाने के लिए सहयोग करना है। यह समझौता निवेश, रियायती वित्तपोषण, संयुक्त सहयोगी परियोजनाओं, कार्यबल विकास और उद्योगों, विशेष रूप से एमएसएमई के लिए तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण की सुविधा प्रदान करेगा, ताकि भारतीय कंपनियों को मूल्य श्रृंखलाओं, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में और अधिक एकीकृत किया जा सके। ये सहकारी गतिविधियां सहकारी कार्य कार्यक्रमों और आईपीईएफ उत्प्रेरक पूंजी कोष जैसे संयुक्त सहयोगी कार्यों के माध्यम से की जाएंगी।
§ֆ:आईपीईएफ सदस्य देशों ने सहकारी कार्य कार्यक्रम यानी सीडब्ल्यूपी तंत्र के माध्यम से जलवायु समाधानों की एक श्रृंखला पर इच्छुक भागीदारों के विभिन्न समूहों के बीच दीर्घकालिक सहयोग बनाने और उसे बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयासों का स्वागत किया, जो आईपीईएफ स्वच्छ अर्थव्यवस्था समझौते के व्यापक लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा। हाइड्रोजन आपूर्ति श्रृंखलाओं (मई 2023 में) और कार्बन बाजारों, स्वच्छ बिजली, टिकाऊ विमानन ईंधन और न्यायसंगत संक्रमण (मार्च 2024 में) पर सीडब्ल्यूपी की घोषणा के बाद से, इस मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने वाले आईपीईएफ के सदस्य देशों ने सहयोग के लिए विस्तृत रोडमैप विकसित किए हैं और चर्चा के दौरान कई सीडब्ल्यूपी पर महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला है। श्री बर्थवाल ने अपने संबोधन में स्वच्छ अर्थव्यवस्था समझौते के तहत सीडब्ल्यूपी का स्वागत किया “जिसे ऊर्जा संक्रमण के उद्देश्यों को सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक अधिक टिकाऊ और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाने में मदद करेगा।”
§ֆ:आईपीईएफ समूह ने आज “ई-वेस्ट अर्बन माइनिंग” पर भारत के नेतृत्व में एक नए सीडब्ल्यूपी की घोषणा की। यह सीडब्ल्यूपी आईपीईएफ सदस्य देशों के लिए अधिक टिकाऊ ई-कचरा प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करेगा। इसमें वर्तमान और उभरती प्रौद्योगिकियों, तकनीकों और गतिविधियों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान के साथ ही सामग्रियों, विशेष रूप से महत्वपूर्ण धातुओं और खनिजों की कुशलता से इकट्ठा करना और इनके पुनर्चक्रण के लिए समाधानों का विकास शामिल है। सचिव श्री बर्थवाल ने कहा कि सीडब्ल्यूपी में भारत का सर्कुलर अर्थव्यवस्था में बदलाव पर ध्यान केंद्रित करना स्पष्ट है, जिसमें संसाधन दक्षता और प्रदूषण रोकथाम पर जोर देते हुए ई-कचरा प्रबंधन पर ध्यान दिया गया है।” वाणिज्य सचिव ने भारत के प्रस्तावित सीडब्ल्यूपी को समर्थन देने के लिए आईपीईएफ के सदस्य देशों को धन्यवाद दिया और अन्य सीडब्ल्यूपी पर आईपीईएफ सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की मंशा से अवगत कराया, ताकि न केवल विकासात्मक उद्देश्यों के लिए बल्कि समाज में उनके योगदान के लिए भी ऐसे सीडब्ल्यूपी से अपार लाभ प्राप्त किया जा सके।
§भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 6 जून 2024 को सिंगापुर में आयोजित समृद्धि के लिए हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे (आईपीईएफ) की मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के सचिव श्री सुनील बर्थवाल ने किया। 14 नवंबर 2023 के आईपीईएफ मंत्रिस्तरीय वक्तव्य में स्वच्छ अर्थव्यवस्था, निष्पक्ष अर्थव्यवस्था और समृद्धि के लिए हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे पर व्यापक समझौते के लिए वार्ता के पर्याप्त समापन की घोषणा की गई। इसके अनुसार, आईपीईएफ में शामिल देशों ने इन समझौतों में शामिल बातों और घरेलू अनुमोदन प्रक्रियाओं की कानूनी समीक्षा पूरी की।

