֍:अरहर की दाल बना देगी मलामाल §ֆ:इसको जंगली अरहर कहते है. इसकी खेती फायदेमंद है. जंगली अरहर की डिमांड विदेशों में खूब है, जिस कारण इसकी कीमत किसानों को अधिक मिलती है. हजारीबाग स्थित आईसीएआर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह बताते हैं कि जंगली अरहर की खेती सामान्य खेती नहीं है. इसकी खेती भारत के छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से में ही की जाती है.
§֍:5 साल तक मिलेगा फसल से मुनाफा §ֆ:आगे बताया कि यह सबसे देसी प्रजाति की अरहर है. साथ ही इसको सबसे जिद्दी फसल माना जाता है. एक बार फसल लग जाने के बाद खत्म नहीं होती. साथ ही इसका पौधा 5 साल तक लगा रहता है. एक पौधे से साल में 10 फसल ली जा सकती है. एक पौधा 10 से 12 फीट तक ऊंचा होता है. लेकिन, इसके बीज आसानी से नहीं मिलते, जिस कारण यह दुर्लभ है.
§֍:1 एकड़ से मिलेंगा इतना मुनाफा §ֆ:अगर किसान इसके बीज खेती के लिए कहीं से ले आता है तो 1 एकड़ में 1 किलो तक बीज पर्याप्त होगा. खेती के लिए सर्वप्रथम अपने खेत को जोतने के साथ ही गोबर खाद का छिड़काव करें. फिर प्रत्येक 5 फीट की दूरी पर इसके दाने बो दें. समय-समय पर इसकी निराई-गुड़ाई भी करते रहें. जरूरत पड़ने पर इसमें दवा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
§֍:एक महीने में तैयार होगाी पहली फसल §ֆ:आगे बताया कि इसकी खेती के लिए जून से लेकर जुलाई माह का समय उपयुक्त माना जाता है. अगर किसान इसकी खेती अभी लगते हैं तो 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच पहली फसल ले सकते हैं. वहीं दूसरी फसल 15 अप्रैल से 15 मई के बीच आएगी. फसल लेने के समय किस पौधों को जमीन से 3 से 3.5 फीट ऊपर काट लें और शेष पौधे हटा लें. मानसून के आगमन के साथ ही पौधों से फिर पत्तियां आने लगेंगी और फसल भी मिलेगी.§भारत के अधिकांश घरों में दाल पकाई और खाई जाती है, जिस कारण से दाल की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा रहती है. सबसे ज्यादा अरहर की दाल लोग पसंद करते हैं. लेकिन, अरहर की एक ऐसी प्रजाति भी है, जिसकी डिमांड देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है. इसकी खेती एक बार करने के बाद किसान 5 साल तक फसल ले सकते हैं.

