ֆ:§ֆ:§भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने नेतृत्व में मूल मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया, तथा युवाओं को प्रलोभन और अनैतिक तौर-तरीकों को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा, “नैतिक नेतृत्व पर समझौता नहीं किया जा सकता; नैतिकता से समझौता करने से आप उस तरह का विजेता नहीं बन सकते, जिसे दुनिया सलाम करेगी।”बोधगया स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के छठे दीक्षांत समारोह में छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने ‘भारत के भविष्य के पथप्रदर्शक’ के रूप में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे जोर देकर कहा, “मैं आपसे एक ऐसे समाज के प्रतिनिधि और दूत बनने का आग्रह करता हूं जहां कानून के शासन का ईमानदारी और कुशलतापूर्वक पालन होता हो।”देश की समृद्धि और संप्रभुता के लिए आर्थिक राष्ट्रवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से ‘स्वदेशी’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनाने की अपील की।

