खरीफ 2025-26 सीजन की बुवाई जारी है और सभी प्रमुख फसलों के पहले अग्रिम अनुमान अभी जारी नहीं हुए हैं, लेकिन पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि कई प्रमुख खरीफ फसलों के क्षेत्र और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में दी।
क्षेत्रफल के आंकड़े
2024-25 में धान का रकबा 434.13 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष से 6.58% अधिक है। मक्का में 1.21%, तूर में 4.77% और मूंग में 6.84% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। मूंगफली में 23.52% की बड़ी छलांग लगी है। वहीं, उड़द, कपास और गन्ना जैसी फसलों के क्षेत्र में कमी आई है।
उत्पादन के आंकड़े
धान का उत्पादन 1218.54 लाख टन रहा, जो 2023-24 की तुलना में 7.59% अधिक है। मक्का में 11.68%, तूर में 4.21%, मूंग में 51.39%, मूंगफली में 19.72% और सोयाबीन में 16.21% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, उड़द, कपास और गन्ना के उत्पादन में गिरावट आई है।
सरकारी कदम
केंद्र सरकार किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और वर्षा में कमी या अधिकता से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कई कदम उठा रही है।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) 2016 से लागू है, जो बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक सभी अप्रतिरोध्य प्राकृतिक जोखिमों के खिलाफ सस्ती और सरल बीमा सुविधा देती है।
- आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, जो राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से राहत देती हैं। गंभीर आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से भी सहायता दी जाती है।
- वर्तमान वर्ष में अब तक किसी भी राज्य ने सूखे के लिए NDRF से वित्तीय सहायता का अनुरोध नहीं किया है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM) भी देश के सभी 28 राज्यों और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता बढ़ाकर अनाज उत्पादन में वृद्धि करना है। इसके तहत किसानों को बीज, फसल संरक्षण तकनीक, एकीकृत पोषण व कीट प्रबंधन, प्रदर्शन, और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।

