मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा अनुमान के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में मॉनसून की सक्रियता के चलते 15 अगस्त तक भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी पर बने निम्न दबाव के कारण देश के मध्य और पूर्वी राज्यों में भी मूसलाधार बारिश होगी, जिससे कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में बारिश का हाल
दिल्ली-एनसीआर में 13 अगस्त (बुधवार) को आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और अधिकतम तापमान 34°C तथा न्यूनतम तापमान 24°C रहने का अनुमान है। आईएमडी ने 18 अगस्त तक लगातार बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसमें 14 अगस्त को 25-35 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के दिन भी मध्यम बारिश होगी, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा।
उत्तर प्रदेश और बिहार में भारी बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश में 13 अगस्त से अगले 48 घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों और पूर्वी यूपी के लगभग सभी इलाकों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी। गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर और बस्ती जैसे जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है ।
बिहार में पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सिवान में 13 अगस्त को बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि पटना समेत दक्षिण बिहार के जिलों में मध्यम बारिश की संभावना है। 14 अगस्त को कैमूर, रोहतास और गया में भी भारी वर्षा का अनुमान है।
उत्तराखंड और हिमाचल में अलर्ट
उत्तराखंड में मौसम विभाग ने देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर जैसे जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जहां 13-14 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा है। राज्य सरकार ने स्कूल बंद करने और अनावश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी है।
हिमाचल प्रदेश में भी ऑरेंज अलर्ट जारी है, जहां बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और शिमला जैसे जिलों में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश होगी।
मध्य और दक्षिण भारत में मॉनसून की मार
बंगाल की खाड़ी के प्रभाव से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना में 13-17 अगस्त तक भारी बारिश होगी। कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में भी 15-18 अगस्त के बीच अत्यधिक वर्षा की चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग ने दिल्ली, यूपी, बिहार और उत्तराखंड के निवासियों से सतर्क रहने की अपील की है। बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और यातायात बाधित हो सकता है, जबकि नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है। अधिक जानकारी के लिए आईएमडी के अपडेट्स पर नजर रखें।

