कृषि और विपणन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। कृषि राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए बताया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) प्लेटफॉर्म, जो 2016 में शुरू किया गया था, ने ग्रामीण किसानों को व्यापक बाजार, पारदर्शिता और बेहतर मूल्य खोज की सुविधा देकर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
उन्होंने कहा कि कृषि विपणन एक राज्य विषय होने के कारण कई राज्यों ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार कृषि उपज विपणन समितियां (APMCs) गठित की हैं। लेकिन किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए ई-नाम प्लेटफॉर्म ने एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इससे न केवल लेनदेन लागत घटी है, बल्कि नकद लेनदेन की आवश्यकता भी कम हुई है और ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा मिला है।
30 जून 2025 तक, देश के 23 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों की 1,522 मंडियों को ई-नाम से जोड़ा जा चुका है। जून 2024 से जून 2025 के बीच, इस प्लेटफॉर्म पर व्यापार मात्रा में 21% और व्यापार मूल्य में 22% की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार हर साल 22 अनिवार्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है, जिसे कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों, राज्य सरकारों और संबंधित मंत्रालयों के विचारों के बाद घोषित किया जाता है। वर्ष 2018-19 से सभी खरीफ, रबी और वाणिज्यिक फसलों के MSP में कुल लागत पर कम से कम 50% लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है।
2014-15 से 30 जून 2025 तक सरकार ने किसानों से 315.19 लाख मीट्रिक टन तिलहन, दलहन और नारियल (कोप्रा) की खरीद की है, जिसकी कुल कीमत ₹1,69,980.90 करोड़ रही। किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) लागू है, जिसमें मूल्य समर्थन योजना (PSS) और मूल्य अंतर भुगतान योजना (PDPS) के तहत तिलहन, दलहन और कोप्रा की खरीद सुनिश्चित की जाती है।
रामनाथ ठाकुर ने कहा कि इन कदमों से किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच, पारदर्शी व्यापार व्यवस्था और स्थायी आमदनी के अवसर मिल रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

