भाकृअनुप-केन्द्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर ने 5 से 7 अगस्त 2025 तक अनुसूचित जाति उपयोजना (S.C.S.P.) के अंतर्गत उत्तर 24 परगना और नादिया जिले के अनुसूचित जाति के किसानों के लिए “गुणवत्तापूर्ण पटसन रेशा उत्पादन हेतु उन्नत पचन प्रौद्योगिकी” पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं क्षेत्र प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया।
इस कार्यक्रम में किसानों को क्रिजाफ सोना द्वारा पटसन की उन्नत पचन तकनीक के महत्व, इसकी चरणबद्ध प्रक्रिया, पारंपरिक रीटिंग (Retting) पद्धतियों के नुकसान और बेहतर बिक्री मूल्य प्राप्त करने हेतु रेशा गुणवत्ता की ग्रेडिंग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ क्रिजाफ सोना पाउडर भी उपलब्ध कराया गया, ताकि वे स्वयं अपने खेतों और गांव के जल स्रोतों में इस तकनीक का उपयोग कर सकें।
क्षेत्र प्रदर्शन से बढ़ा उत्साह
कार्यक्रम के दौरान किसानों के गांवों के पास स्थित तालाबों में उन्नत पचन प्रौद्योगिकी का मैदानी प्रदर्शन किया गया। इस दौरान किसानों ने नज़दीक से देखा कि नई तकनीक से रेशा की गुणवत्ता में कैसे सुधार आता है और बाजार में उसकी कीमत कैसे बढ़ सकती है।
किसानों की सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम में उत्तर 24 परगना के बारासात-1 और हिंगलगंज ब्लॉक, तथा नादिया जिले के राणाघाट ब्लॉक के कुल 150 किसान शामिल हुए। प्रतिभागियों ने इस तकनीक को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई और इसे अपने गांवों में लागू करने की इच्छा जताई।
संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से न केवल रेशा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी, जिससे पटसन उत्पादन करने वाले क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

