केंद्र सरकार ने धार्मिक और परोपकारी संस्थाओं द्वारा जन-सेवा के रूप में निःशुल्क भोजन, प्रसाद, लंगर और भंडारा वितरण को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही सेवा भोज योजना के तहत अब तक कई प्रमुख संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस योजना के अंतर्गत इन संस्थाओं को खरीदे गए विशेष कच्चे खाद्य पदार्थों पर चुकाए गए केंद्रीय जीएसटी (CGST) और केंद्र सरकार के हिस्से के आईजीएसटी (IGST) की राशि वापस की जाती है।
योजना का उद्देश्य और पात्रता
सेवा भोज योजना का उद्देश्य धार्मिक/परोपकारी संस्थाओं को निःशुल्क भोजन वितरण में आने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। इसके लिए पात्र संस्थाएँ वे हैं—
- जो आयकर अधिनियम की धारा 10(23BBA) या 12AA के तहत पंजीकृत हों, या कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत बनी हों।
- जो कम से कम पिछले तीन वर्षों से लगातार मुफ्त भोजन वितरण कर रही हों।
- जो प्रति माह कम से कम 5000 लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराती हों।
- जो केंद्र/राज्य सरकार से इसी उद्देश्य के लिए पहले से कोई अन्य वित्तीय सहायता न ले रही हों।
योजना से लाभान्वित प्रमुख संस्थाएँ
अब तक इस योजना का लाभ लेने वाली प्रमुख संस्थाओं में शामिल हैं—
- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC), अमृतसर
- तिरुमला तिरुपति देवस्थानम्, आंध्र प्रदेश
- श्री वेंकटेश्वर अन्नप्रसादम ट्रस्ट, तिरुपति
- ड्रीम्स एंड ब्यूटी चैरिटेबल ट्रस्ट, लुधियाना
- दुर्गियाना मंदिर, अमृतसर
वर्षवार वित्तीय सहायता (राशि लाख रुपये में)
- 2019-20: SGPC – 171.00, TTD – 19.63, वेंकटेश्वर ट्रस्ट – 27
- 2020-21: SGPC – 159.39, ड्रीम्स एंड ब्यूटी – 22, दुर्गियाना मंदिर – 8.84
- 2021-22: SGPC – 149.83, ड्रीम्स एंड ब्यूटी – 28, दुर्गियाना मंदिर – 4.81
- 2022-23: SGPC – 140.44, ड्रीम्स एंड ब्यूटी – 80, दुर्गियाना मंदिर – 1.76
- 2023-24: SGPC – 142.12, दुर्गियाना मंदिर – 88
- 2024-25: SGPC – 128.71, दुर्गियाना मंदिर – 53, ड्रीम्स एंड ब्यूटी – 1.30
सरकार का कहना है कि बजटीय प्रावधानों के तहत पात्र संस्थाओं से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने पर सहायता राशि समय पर जारी करना उसकी प्राथमिकता है, जिससे धार्मिक और परोपकारी संस्थाओं का निःशुल्क भोजन वितरण का कार्य बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

