पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। अमृतसर में किसान मजदूर संघर्ष समिति (केएमएससी) के नेतृत्व में बड़ी बाइक रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। इससे पहले भी लुधियाना के जोधन गांव में ‘जमीन बचाओ’ रैली का आयोजन किया गया था। किसान नेताओं का आरोप है कि यह नीति कृषि भूमि को कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में सौंपने की साजिश है, जिससे राज्य में खाद्य संकट पैदा हो सकता है।
हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सरकार को झटका
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस नीति पर स्टे लगाते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इस नीति को जल्दबाजी में लागू किया गया है और इसमें सामाजिक प्रभाव, पर्यावरणीय मुद्दों तथा शिकायत निवारण तंत्र को नजरअंदाज किया गया है। जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की बेंच ने टिप्पणी की कि अधिग्रहण के लिए चुनी गई जमीन राज्य की सबसे उपजाऊ भूमि है, जिससे सामाजिक असंतोष पैदा हो सकता है।
किसानों का आरोप: “कृषि भूमि हड़पने की साजिश”
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि सरकार 40,000 एकड़ से अधिक उपजाऊ जमीन निजी कंपनियों को देने की तैयारी कर रही है, जिस पर गेहूं, धान और सब्जियां उगाई जाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे खेती खत्म हो जाएगी और भविष्य में भोजन की किल्लत हो सकती है।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने भी इस नीति को “काला कानून” बताते हुए कहा कि यह 65,000 एकड़ से अधिक जमीन कॉर्पोरेट्स को सौंपने की योजना है। उन्होंने 7 अगस्त को लुधियाना में बड़े प्रदर्शन की घोषणा की और कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार नीति वापस नहीं लेती।
राजनीतिक विरोध भी तेज
इस मुद्दे पर विपक्षी दल भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल ने नीति का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस नेता राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि आप सरकार बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों की जमीन हड़प रही है।
आगे की रणनीति
किसान संगठनों ने 20 अगस्त को जालंधर में विशाल महापंचायत बुलाई है और चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो राज्यव्यापी चक्का जाम और बंद का रास्ता अपनाया जाएगा।
इस प्रकार, पंजाब में लैंड पूलिंग नीति को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

