केंद्र सरकार ने सितंबर 2024 में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य देश में एक मजबूत डिजिटल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इसके तहत एग्री स्टैक, कृषि निर्णय सहायता प्रणाली, व्यापक मृदा उर्वरता एवं प्रोफ़ाइल मानचित्र और अन्य आईटी पहलों के माध्यम से किसानों को समय पर सटीक फसल संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
एग्री स्टैक में कृषि क्षेत्र से जुड़ी तीन प्रमुख रजिस्ट्रियां शामिल हैं — जियो-रेफरेंस्ड विलेज मैप्स, क्रॉप सौन रजिस्ट्री और फार्मर्स रजिस्ट्री। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तैयार और संचालित इस फार्मर्स रजिस्ट्री में सभी भू-स्वामी किसानों का विवरण दर्ज है। 4 अगस्त 2025 तक कुल 7,04,49,809 किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। वहीं, रबी 2024-25 सीजन में 492 जिलों में 23.5 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल फसल सर्वे किया गया।
एग्री स्टैक के जरिए किसानों की जनसांख्यिकीय जानकारी, भूमि स्वामित्व और बोई गई फसलों का पूरा डेटा उपलब्ध होता है, जिससे किसान डिजिटल रूप से अपनी पहचान सत्यापित कर विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे ऋण, बीमा, खरीद-फरोख्त आदि का लाभ उठा सकते हैं। राज्य सरकारें भी इस डेटा के आधार पर किसान-केंद्रित समाधान तैयार कर रही हैं, जिससे किसान भरोसेमंद तरीके से ऑनलाइन इनपुट और उत्पाद खरीद-बिक्री कर सकें।
कई राज्यों में किसान आईडी का उपयोग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में नामांकन के लिए शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र में इसे खरीफ 2025 से लागू किया गया है, जबकि कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी इसका उपयोग हो रहा है। किसान आईडी का इस्तेमाल किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने में भी किया जा रहा है, ताकि किसानों को समय पर ऋण मिल सके।

