ओडिशा में दो दशक से अधिक समय तक सत्ता में रही नवीन पटनायक सरकार के 2024 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहली बार सत्ता में आई भाजपा सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा सड़क पर उतरने वाला है। बीजू जनता दल (बीजद) के किसान प्रकोष्ठ ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर किसानों के हितों के खिलाफ काम करने का भारी आरोप लगाते हुए 18 अगस्त को बरगढ़ में एक विशाल किसान रैली आयोजित करने का ऐलान किया है।
बीजद के किसान प्रकोष्ठ के संयोजक प्रसन्न आचार्य ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “मोहन चरण मजूमदार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार दोनों ही किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रही हैं। किसानों को बताने के लिए कि यह सरकार उनका किस तरह शोषण कर रही है, हम 18 अगस्त को बरगढ़ में एक बहुत बड़ी रैली करेंगे।”
बजट में कटौती और विकास दर गिरने का आरोप
आचार्य ने राज्य की कृषि विकास दर में भारी गिरावट का दावा करते हुए गंभीर आरोप लगाए:
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उनके अनुसार, कृषि विकास दर 2023-24 में 7.6 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में गिरकर केवल 3.8 प्रतिशत रह गई है।
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उन्होंने दावा किया कि राज्य को इस वित्त वर्ष में कुल केंद्रीय सहायता में 18.19 प्रतिशत की गिरावट झेलनी पड़ी है।
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कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन में भारी कटौती का आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया कि यह राशि 2023-24 के 21,011 करोड़ रुपये से घटाकर 2024-25 में मात्र 17,089 करोड़ रुपये कर दी गई है।
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उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत मिलने वाले फंड में भारी कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह 146 करोड़ रुपये से गिरकर सिर्फ 32 करोड़ रुपये रह गया है।
धान खरीद को लेकर बवाल: नए नियमों से नाराजगी
आचार्य ने धान खरीद को लेकर किसानों की बढ़ती नाराजगी को रेखांकित किया। बीजद के उपाध्यक्ष संजय दास बर्मा ने इस संबंध में गंभीर आरोप लगाए:
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उन्होंने कहा कि नए धान खरीद पंजीकरण नियम, जिसमें कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) की अनिवार्यता शामिल है, किसानों को हतोत्साहित करने और उन्हें परेशान करने के लिए बनाए गए हैं।
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बर्मा ने आरोप लगाया कि यह नियम किसानों को वादा किए गए 800 रुपये प्रति क्विंटल की इनपुट सब्सिडी का भुगतान करने से बचने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
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पार्टी ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) पर भी निशाना साधा। आरोप है कि FCI द्वारा समय पर धान का उठान नहीं किए जाने के कारण किसान मजबूरी में अपनी उपज कम दामों पर बेचने को विवश हैं।
राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत: ‘कृषक समावेश’
प्रसन्न आचार्य ने स्पष्ट किया कि 18 अगस्त की बरगढ़ रैली बीजद के ‘कृषक समावेश’ (किसान सम्मेलन) अभियान की शुरुआत भर है। उन्होंने घोषणा की कि यह विरोध प्रदर्शन पूरे ओडिशा में आयोजित किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य राज्य के किसानों को सरकार की “नाकामियों और किसान विरोधी नीतियों” के खिलाफ एकजुट करना है।
इस रैली को राज्य में भाजपा सरकार के खिलाफ किसानों का पहला बड़ा संगठित विरोध माना जा रहा है। बीजद नेतृत्व का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने किसानों के हितों की अनदेखी की है और कृषि बजट में कटौती की है। अब देखना यह है कि बरगढ़ की रैली में कितने किसान शिरकत करते हैं और सरकार इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देती है। किसानों का यह आक्रोश राज्य की नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

