एक्सट्रीम वेदर का बढ़ता खतरा
इस साल मानसून के अब तक के दिनों में 65% समय एक्सट्रीम वेदर देखा गया, जो 2022 में 33% था. 2023 में यह 47% और 2024 में 59% था. यह साफ दिखता है कि हर साल स्थिति और खराब हो रही है. मॉनसून 1 जून से 30 सितंबर तक 122 दिन का होता है. 5 अगस्त तक आधा समय बीत चुका है.
फिर भी 43 दिन एक्सट्रीम वेदर के रहे, जो 2022 के पूरे सीजन (44 दिन) के बराबर है. अगर यही ट्रेंड रहा, तो अगले 56 दिनों में और 40-43 दिन अति-मौसम हो सकते हैं, यानी कुल 83-86 दिन पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ देंगे.
15 में आईं 48 आपदाएं
इस खराब मौसम ने भारी नुकसान पहुंचाया है. 1 जून से 5 अगस्त 2025 के बीच कम से कम 48 लोग मौसम से जुड़ी आपदाओं में मारे गए. यह 2022 के पूरे सीजन (56 मौतें) के 86% और 2023 के 104 मौतों का करीब 46% है. खतरा अभी खत्म नहीं हुआ. 5 अगस्त को उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बाढ़ आई, जिसमें 4 लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग लापता हैं.

