नई दिल्ली में भाकृअनुप (ICAR) और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल एग्रीकल्चर (IITA), नाइजीरिया के बीच द्विपक्षीय अनुसंधान सहयोग को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर IITA के महानिदेशक डॉ. सिमियन एहुई के नेतृत्व में तीन-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने डेयर सचिव एवं भाकृअनुप के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट से मुलाकात की। इस बैठक में भाकृअनुप के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने कृषि अनुसंधान एवं विकास (R&D) के अनेक संभावित क्षेत्रों की पहचान की, जिनमें संयुक्त रूप से सहयोग किया जा सकता है। चर्चा के प्रमुख विषयों में जलवायु-सहिष्णु कृषि तकनीकें, ट्रॉपिकल फसल सुधार, खाद्य और पोषण सुरक्षा, जैविक कृषि, मृदा स्वास्थ्य तथा सतत कृषि प्रणाली शामिल थे।
डॉ. एम.एल.जाट ने कहा कि ICAR और IITA के बीच यह संवाद वैश्विक कृषि अनुसंधान में दक्षिण-दक्षिण सहयोग को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और इस सहयोग से उन्नत तकनीकों और संसाधनों का आदान-प्रदान संभव होगा, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
डॉ. सिमियन एहुई ने भारत के साथ साझेदारी को सराहते हुए कहा कि IITA और ICAR के बीच यह सहयोग अफ्रीका और एशिया के उभरते कृषि संकटों से निपटने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार को बढ़ावा देगा। बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने इस सहयोग को संस्थागत रूप देने और भविष्य में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
यह वार्ता न केवल अंतरराष्ट्रीय कृषि सहयोग को नई दिशा देने वाली है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भी एक प्रेरणादायक प्रयास मानी जा रही है।

