कृषि अनुसंधान और पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श के तहत, नई दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चरल साइंसेज कॉम्प्लेक्स (NASC) में आयोजित एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2025 के दूसरे पूर्ण सत्र (Plenary Session II) का आयोजन किया गया। इस सत्र का विषय था – “बेहतर पोषण हेतु कृषि-खाद्य प्रणाली में रूपांतरण: एवरग्रीन क्रांति 2.0″, जिसकी अध्यक्षता भाकृअनुप (ICAR) के महानिदेशक एवं डेयर सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने की।
डॉ. एम.एल. जाट ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और नीति समन्वय के माध्यम से कृषि-खाद्य प्रणाली को पोषण उन्मुख बनाना समय की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एवरग्रीन क्रांति 2.0 का उद्देश्य केवल उत्पादन वृद्धि नहीं, बल्कि संतुलित पोषण, पर्यावरणीय स्थिरता और किसानों की आय में समवेत सुधार लाना है।
इस सत्र में विविध देशों के वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, कृषि विशेषज्ञों और पोषण विज्ञानियों ने भाग लिया और खाद्य प्रणाली में सुधार के लिए नवाचार आधारित रणनीतियों, जैसे बायो-फोर्टिफिकेशन, फसल विविधिकरण, महिला एवं बाल पोषण पर केंद्रित योजनाएं और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर विचार साझा किए।
सत्र के दौरान यह भी चर्चा हुई कि स्वामीनाथन जी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए हमें पोषण सुरक्षा को कृषि विकास के केंद्र में लाना होगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियों को स्वस्थ एवं टिकाऊ खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। यह सत्र भारत सहित विकासशील देशों के लिए कृषि-आधारित पोषण रणनीतियों को नया दिशा देने में मील का पत्थर साबित हुआ, जो स्वामीनाथन जी के दृष्टि, विज्ञान और सेवा भावना को श्रद्धांजलि भी है।

