उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के ब्रजघाट क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश और बिजनौर बैराज से छोड़े गए पानी के कारण नदी का स्तर तेजी से बढ़ा है। इससे खादर क्षेत्र के गांवों में जलभराव हो गया है, जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और पशुओं के चारे की भारी किल्लत हो गई है।
प्रशासन की तैयारियां और निगरानी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हापुड़ के जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय और एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने रात्रिकालीन दौरा कर प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। प्रशासन ने बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं और ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की है। जिला प्रशासन की टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं तथा आपातकालीन राहत और बचाव कार्यों के लिए तैयार हैं।
ग्रामीणों के लिए चेतावनी और व्यवस्थाएं
डीएम अभिषेक पांडेय ने बताया कि गंगा से सटे गांवों जैसे लठीरा और मढ़ैया में पानी घुस चुका है। उन्होंने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे खेतों और जंगलों में न जाएं तथा पशुओं को भी न छोड़ें। प्रशासन ने ग्रामीणों के लिए चारे, मेडिकल सुविधाएं और नावों का प्रबंध किया है। गांवों के निकास मार्गों पर नाविकों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
किसानों की बदहाली और प्रशासन पर आरोप
हालांकि, प्रशासन के दावों के बावजूद, कई ग्रामीणों ने राहत कार्यों में ढिलाई का आरोप लगाया है। लठीरा गांव के किसान सतपाल गौतम ने बताया कि फसलें जलमग्न होने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है, लेकिन अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। एक अन्य ग्रामीण बसंता यादव ने कहा कि पशुओं के लिए चारे की कमी हो गई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं पहुंची है।
आगे की स्थिति और चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। गंगा का जलस्तर यदि और बढ़ता है, तो अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
इस आपदा से निपटने के लिए प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

