प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत अब 14 राज्यों में नए पंजीकरण के लिए “फार्मर आईडी” को अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करना और योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता को और अधिक मजबूत बनाना है।
योजना के अंतर्गत अब तक ₹3.90 लाख करोड़ की सहायता
फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत देश भर के किसानों को अब तक ₹3.90 लाख करोड़ से अधिक की राशि 20 किस्तों में उनके आधार लिंक बैंक खातों में सीधे DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जा चुकी है। पात्रता के तहत कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व आवश्यक है, हालांकि उच्च आय वर्ग से जुड़े कुछ अपवादों को योजना से बाहर रखा गया है।
फार्मर आईडी से मिलेगी पारदर्शिता और सटीकता
अब 14 राज्यों में नए किसान पंजीकरण के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी गई है, जिससे योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही मिल सके। यह कदम पंजीकरण में डुप्लीकेसी, त्रुटियों और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करने की दिशा में एक और मजबूत प्रयास है।
पंजीकरण के लिए विभिन्न विकल्प उपलब्ध
राज्यों द्वारा किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए कई माध्यम सक्रिय किए गए हैं, जैसे कि:
- स्व-पंजीकरण (Self-registration)
- कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) मोड
- ऑपरेटर मोड (जिसमें कृषि और राजस्व विभाग के फील्ड स्तर के अधिकारी शामिल हैं)
- सहायक मोड (Sahayak Mode)
यदि किसी स्तर पर कोई तकनीकी या दस्तावेज़ी समस्या आती है, तो जिला स्तर पर प्रशासन के सहयोग से उसे तुरंत हल करने की व्यवस्था की गई है।
फिलहाल सहायता राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं
मंत्री ने स्पष्ट किया कि PM-KISAN योजना की मौजूदा सहायता राशि ₹6,000 प्रति वर्ष ही रहेगी, और फिलहाल इस राशि में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
डिजिटल बुनियादी ढांचे से किसानों को मिला सीधा लाभ
आधार सीडेड खातों और डिजिटल पंजीकरण के चलते योजना के लाभ किसानों तक बिना किसी बिचौलिये के सीधे पहुंच रहे हैं। सरकार द्वारा निर्मित यह किसान-केंद्रित डिजिटल प्रणाली किसानों को पारदर्शी, त्वरित और सटीक सहायता प्रदान कर रही है।
फार्मर आईडी की अनिवार्यता, बहुस्तरीय पंजीकरण प्रणाली और डिजिटल माध्यमों के उपयोग से PM-KISAN योजना और अधिक पारदर्शी, सटीक और किसान-हितैषी बनती जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र किसान तक इस योजना का लाभ पूरी ईमानदारी और समयबद्ध तरीके से पहुंचे।

