उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम के नजदीक स्थित धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने की भयावह घटना हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में तबाही मच गई। बादल फटने के बाद खीर गंगा नदी में अचानक आई बाढ़ और पहाड़ी मलबे के सैलाब ने दर्जनों घरों, होटलों और होमस्टे को बहा दिया। कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है, जबकि राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है।
घटना का विवरण
दोपहर करीब 1:30 बजे धराली गांव में बादल फटने से खीर गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। पहाड़ों से मलबा और पानी का तेज प्रवाह निचले इलाकों में आ गया, जिससे 20-25 होटल, घर और होमस्टे पूरी तरह तबाह हो गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि 10-12 मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
राहत और बचाव अभियान
घटना के बाद एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और सेना की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और हालात पर नजर रखी जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा, “धराली में बादल फटने से हुए नुकसान की खबर अत्यंत दुखद है। राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है और हम प्रभावितों की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”
प्रभावित क्षेत्र की स्थिति
धराली गांव गंगोत्री धाम और मुखवा के शीतकालीन प्रवास स्थल के करीब है, जिससे यहां तीर्थयात्रियों का आवागमन भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों से नदी और खतरनाक इलाकों से दूर रहने की अपील की है।पिछले हादसों की याद
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इस साल बादल फटने और भारी बारिश की कई घटनाएं हो चुकी हैं। 29 जून को उत्तरकाशी के बड़कोट क्षेत्र में बादल फटने से 8-9 मजदूर लापता हो गए थे 1, जबकि हिमाचल में इसी तरह की घटनाओं में 170 लोगों की मौत हो चुकी है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन का सिलसिला जारी है, जिससे प्रशासन को लगातार अलर्ट रहना पड़ रहा है। धराली में हुई यह घटना एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बादल फटने के खतरे को उजागर करती है। राहत कार्यों के साथ-साथ मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में और बारिश की चेतावनी जारी की है।

