पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) में “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME)” पर एक दिवसीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, उद्यमी और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस अवसर पर पंजाब के कृषि मंत्री सरदार गुरमीत सिंह खूडियां ने उद्घाटन भाषण में कहा, “पंजाब की तरक्की वैज्ञानिकों की मेहनत और किसानों की निष्ठा का परिणाम है।” उन्होंने प्रदेश में डेयरी व्यवसाय को कृषि का सशक्त सहायक क्षेत्र बताते हुए इसमें विविधता और नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का आयोजन PAU के विस्तार शिक्षा निदेशालय, पंजाब एग्रो इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन, खाद्य प्रसंस्करण विभाग, पंजाब और प्रोसेसिंग एवं फूड इंजीनियरिंग विभाग, PAU के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार जल्द ही बड़े मंडियों की स्थापना की योजना पर कार्य कर रही है, जहां किसान और उद्यमी अपनी दुकानें खोल सकेंगे और सीधे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराएंगे।
PAU के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने स्वंय विपणन (सेल्फ-मार्केटिंग) और ई-विपणन (ई-मार्केटिंग) को दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने PAU के बिज़नेस स्टडीज़ स्कूल, कौशल विकास केंद्र और एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट की सराहना की, जिन्होंने राज्यभर में 350 से अधिक एग्रो-प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।
गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (GADVASU) के कुलपति डॉ. जेपीएस गिल ने बताया कि पंजाब में 14.3 मिलियन टन दूध का वार्षिक उत्पादन हो रहा है। हालांकि यह उत्पादन पर्याप्त है, परन्तु प्रोसेसिंग के विविध स्वरूपों की दिशा में काम करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि फ्लेवर युक्त दूध, पनीर, खोया, प्रोसेस्ड चीज आदि के उत्पादन के लिए स्व-सहायता समूहों (SHGs) का गठन किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने झींगा और मत्स्य पालन के उदय की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना की वकालत की।
पंजाब की प्रधान सचिव (खाद्य प्रसंस्करण) श्रीमती रेखी गुप्ता भंडारी ने लुधियाना को राज्य का औद्योगिक केंद्र बताते हुए ‘सनशाइन इंडस्ट्री’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हरित क्रांति से खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की ओर परिवर्तन किया जाए।
खाद्य प्रसंस्करण विभाग की विशेष सचिव हरगुंजीत कौर ने नवाचारों और नए विचारों को राज्य सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया, ताकि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू कर पंजाब को एग्रो-बेस्ड हब बनाया जा सके।पंजाब राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष बल मुकुंद शर्मा ने सिरहिंद के सफल खाद्य प्रसंस्करण मॉडल का उदाहरण देते हुए किसानों और एफपीओ को तकनीकी सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता जताई।
प्रोसेसिंग और फूड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर महेश कुमार ने बताया कि उद्यमिता विकास कार्यक्रमों और उत्पाद-विशेष प्रशिक्षणों के जरिए युवाओं को सूक्ष्म खाद्य उद्यम स्थापित करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। लुधियाना की मेयर इंदरजीत कौर ने पंजाब के युवाओं के विदेश पलायन पर चिंता जताई और कहा कि राज्य में सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं, आवश्यकता केवल उन्हें उचित दिशा देने की है।
इस मौके पर PMFME योजना से लाभान्वित उद्यमी रणजीत सिंह और गुरप्रीत कौर (पटियाला) ने अपने सफलता की कहानियाँ साझा कीं। कार्यक्रम के अंत में कृषि मंत्री ने प्रमुख पंजाबी उद्यमियों को सम्मानित किया जिन्होंने एग्रो-प्रोसेसिंग क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। डॉ. एमएस भुल्लर, निदेशक, विस्तार शिक्षा, ने सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बताया कि PAU राज्य में सूक्ष्म प्रोसेसिंग और कृषि व्यवसाय उन्नयन में प्रशिक्षण के लिए पहली पसंद है।

