केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कोलकाता में आयोजित क्षेत्रीय समीक्षा बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य में मत्स्य पालन योजनाओं के क्रियान्वयन में मौजूदा खामियों को दूर करे, विशेष रूप से नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) पर कम पंजीकरण की समस्या को प्राथमिकता से सुलझाए।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लगभग 32 लाख मछुआरों में से केवल एक छोटा हिस्सा ही NFDP पर पंजीकृत है, जिसके कारण वे प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) सहित केंद्र सरकार की कई लाभकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।
श्री सिंह ने राज्य में आंतरिक जल मत्स्य पालन की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए पारंपरिक जल स्रोतों जैसे पुकुर (तालाबों) के बेहतर उपयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मत्स्य किसानों के लिए सहकारी ढांचे को मजबूत करना और प्रसंस्करण (processing) के लिए एक ठोस पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य में ड्राई फिश क्लस्टर की स्थापना की योजना पर भी विचार हो रहा है, जिससे स्थानीय रोजगार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और पिछले एक दशक में मछली उत्पादन में 104% की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, आंतरिक जल मत्स्य उत्पादन में 142% वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि देश के मछली निर्यात में आंतरिक जल क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीकों, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और कृत्रिम रीफ जैसे प्रयासों के पुनरुद्धार से इस क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और भारत सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी भी उपस्थित रहे। दोनों ने संस्थागत सहयोग, केंद्र-राज्य समन्वय और योजनाओं के कुशल क्रियान्वयन तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।
कोलकाता के एक होटल में आयोजित यह क्षेत्रीय समीक्षा बैठक पूर्वी भारत के चार राज्यों – पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ की मत्स्य पालन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। बैठक में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), मत्स्य और जलकृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और PM-MKSSY जैसी प्रमुख योजनाओं की प्रस्तुतियों और जमीनी रिपोर्ट साझा की गई।
बैठक का उद्देश्य इन योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन करना और भविष्य की कार्ययोजना तय करना था, जिससे इस क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें।

