उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने बाढ़ का रूप ले लिया है। मौसम विभाग ने छह अगस्त तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। प्रदेश के 18 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल के हालात विशेष रूप से चिंताजनक हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी और अलर्ट
मौसम विभाग ने सोमवार को प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़, चित्रकूट, महोबा, बांदा और कौशाम्बी समेत कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा मिर्ज़ापुर, चंदौली, वाराणसी, ग़ाज़ीपुर आदि जिलों के लिए यलो अलर्ट भी जारी है। इन क्षेत्रों में 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, मेघगर्जन और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना है।
जनहानि और प्रभावित क्षेत्र
बारिश और बाढ़ से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कौशाम्बी में तीन, मिर्जापुर और सुल्तानपुर में दो-दो तथा गाजीपुर, बदायूं, बिजनौर, बलरामपुर, महोबा, फतेहपुर, प्रतापगढ़, अमरोहा, मऊ और पीलीभीत में एक-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है 414। प्रदेश के 17 जिलों की 37 तहसीलों और 402 गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे 84,392 लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 343 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 2,759 मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
प्रशासन की तैयारियां और राहत कार्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाढ़ शरणालयों में महिला सुरक्षा, बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था और रेस्क्यू ऑपरेशन में केवल बड़ी नावों के उपयोग पर जोर दिया है। प्रशासन की ओर से 493 नावों और मोटरबोट्स की मदद से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। 47,906 लोगों को राहत सहायता प्रदान की जा चुकी है।
शिक्षण संस्थानों पर प्रभाव
भारी बारिश को देखते हुए लखनऊ, सीतापुर और बरेली में कक्षा आठ तक के स्कूलों को बंद कर दिया गया है। लखनऊ में लगातार 50 घंटे से बारिश हो रही है, जिससे शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
नदियों का जलस्तर और आगे की संभावना
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर पहुंच चुका है, जबकि वाराणसी में गंगा का स्तर प्रति घंटे 1 सेमी बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 24-36 घंटे तक भारी बारिश जारी रहने के बाद ही स्थिति में सुधार की संभावना है।
राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 11 मंत्रियों की विशेष टीम गठित की है, जो मैदानी स्तर पर राहत कार्यों की निगरानी कर रही है। प्रभावितों को त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय किया गया है।

