झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन का लंबी बीमारी के बाद आज सुबह 8:56 बजे दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की, जिन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं।” 27
स्वास्थ्य संबंधी जानकारी
शिबू सोरेन पिछले एक महीने से गंभीर रूप से बीमार थे और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। जून के अंत में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया था, जिसके बाद उनके शरीर के बाईं ओर पैरालिसिस हो गया था। इसके अलावा, वह किडनी की बीमारी से भी पीड़ित थे। उनका इलाज दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में चल रहा था, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही थी।
राजनीतिक सफर
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को बिहार (अब झारखंड) के हजारीबाग जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता शोभराम सोरेन की हत्या महाजनों द्वारा की गई थी, जिसके बाद उन्होंने आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया। 1972 में उन्होंने एके रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की, जिसने बिहार से अलग झारखंड राज्य के गठन में अहम भूमिका निभाई।
वह 1980 में पहली बार दुमका से लोकसभा सांसद चुने गए और इसके बाद 1989, 1991, 1996, 2004, 2009 और 2014 में भी जीत हासिल की। उन्होंने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री का पद संभाला, लेकिन हर बार उनका कार्यकाल छोटा रहा। 2004 में वह यूपीए सरकार में कोयला मंत्री बने, लेकिन चिरूडीह हत्याकांड के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
विवाद और विरासत
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन विवादों से घिरा रहा। 1975 के चिरूडीह हत्याकांड और 1994 में अपने निजी सचिव की हत्या के आरोपों का सामना करना पड़ा, हालांकि बाद में उन्हें इनमें से कई मामलों में बरी कर दिया गया। फिर भी, उन्हें आदिवासी समुदाय का मसीहा माना जाता था और उनके समर्थक उन्हें “दिशोम गुरु” कहकर पुकारते थे।
उनके निधन से झारखंड की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। उनकी विरासत को उनके बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगे बढ़ा रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकार के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके योगदान को याद किया है।
अंतिम संस्कार
उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां रांची में की जा रही हैं, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी जाएगी

