केंद्र सरकार द्वारा देश को खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चलाया जा रहा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-OS) अभियान अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम देने लगा है। इस मिशन का उद्देश्य देश में प्रमुख तिलहन फसलों जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, केस्टर, अलसी, कुसुम, नीगर के उत्पादन को बढ़ाना है। साथ ही कपास बीज, नारियल, चावल की भूसी जैसे द्वितीयक स्रोतों और वृक्ष-आधारित तिलहनों (TBOs) से तेल निकालने की दक्षता को बढ़ाना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।
उच्च उत्पादक किस्मों का विकास
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) देशभर की केंद्रीय एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर पांच बहु-विषयक अनुसंधान परियोजनाओं (AICRPs) चला रहा है, जिनके तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपयुक्त उच्च उत्पादक किस्में और कृषि तकनीक पैकेज विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, दो प्रमुख शोध परियोजनाएं हाइब्रिड डेवलपमेंट और जीन एडिटिंग पर केंद्रित हैं, जिससे जलवायु-लचीली एवं उच्च उत्पादक किस्में तैयार की जा सकें।
वर्ष 2014 से 2025 तक, देश में 432 उच्च उत्पादक किस्मों/हाइब्रिड्स को व्यावसायिक खेती के लिए अधिसूचित किया गया है, जिनमें:
- सरसों की 104 किस्में
- सोयाबीन की 95
- मूंगफली की 69
- अलसी की 53
- तिल की 34
- कुसुम की 25
- सूरजमुखी की 24
- केस्टर की 15
- नीगर की 13 किस्में शामिल हैं।
बीज उत्पादन और वितरण
पिछले पांच वर्षों (2019-20 से 2023-24) के दौरान, तिलहन फसलों की मांग के अनुसार 1.53 लाख क्विंटल ब्रेडर बीज का उत्पादन और वितरण किया गया है, जिससे सार्वजनिक और निजी बीज एजेंसियों को प्रमाणित बीज उत्पादन में सहायता मिली है। देशभर में जिला स्तरीय बीज हब भी स्थापित किए गए हैं, ताकि किसानों को गुणवत्ता वाले बीज सुलभ हो सकें।
600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर
NMEO-OS के अंतर्गत देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर चिन्हित किए गए हैं, जो हर साल 10 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करते हैं। ये क्लस्टर FPOs और सहकारी संस्थाओं जैसे वैल्यू चेन पार्टनर्स द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। यहां किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज मुफ्त में, उत्तम कृषि पद्धतियों (GAPs) का प्रशिक्षण, कीट प्रबंधन और मौसम सलाह, साथ ही फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की भी सुविधा दी जा रही है।
प्रदर्शन परियोजनाओं के माध्यम से जागरूकता
मिशन के तहत तिलहन किसानों में जागरूकता फैलाने हेतु:
- ICAR द्वारा फ्रंटलाइन डेमोन्स्ट्रेशन
- कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) द्वारा क्लस्टर स्तर पर प्रदर्शन
- राज्य कृषि विभागों द्वारा ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियान के माध्यम से लोगों को तिलहन आधारित स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
बीमा सुरक्षा भी तिलहन किसानों के साथ
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत 2024-25 में अधिकांश राज्यों में तिलहन फसलें जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, तिल, सूरजमुखी, अलसी, केस्टर आदि को बीमा सुरक्षा में शामिल किया गया है, जिससे किसान प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रह सकें।
आत्मनिर्भर ऑयल सीड्स अभियान न केवल देश को खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि किसानों को भी तकनीकी, आर्थिक और प्रशिक्षण के स्तर पर सशक्त कर रहा है। यह भारत को स्वस्थ, टिकाऊ और समृद्ध कृषि अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।

