भारत सरकार खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में मजबूत कदम उठा रही है। विशेष रूप से कच्चे पाम तेल (सीपीओ) के क्षेत्र में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल पाम (एनएमईओ-ओपी) योजना के तहत देश में ऑयल पाम की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
लोकसभा में दी जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में 1.91 लाख टन रहा कच्चे पाम तेल का उत्पादन अब 2024-25 में बढ़कर 3.80 लाख टन तक पहुंच गया है, जो देश की खाद्य तेलों पर आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है।
योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 2021-26 की अवधि के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
- मार्च 2025 तक 89 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र को ऑयल पाम खेती के तहत लाया गया, जिससे कुल कवरेज 5.56 लाख हेक्टेयर हो गया।
- ऑयल पाम के पौधे चौथे वर्ष से फल देना शुरू करते हैं और आठवें वर्ष तक इष्टतम उत्पादन क्षमता तक पहुँच जाते हैं, जिससे भविष्य में कच्चे पाम तेल का उत्पादन और बढ़ने की संभावना है।
किसानों के हित में मूल्य सुरक्षा:
- ताजे फलों के गुच्छों (FFB) की खरीद के लिए राज्य सरकारें प्रत्येक माह फार्मूला प्राइस घोषित करती हैं, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।
- यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट के कारण फार्मूला प्राइस कम हो जाए, तो केंद्र सरकार व्यवहार्यता मूल्य की घोषणा करती है और व्यवहार्यता अंतर भुगतान (VGP) के रूप में किसानों को अतिरिक्त सहायता देती है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम:
भारत में खाद्य तेलों की खपत लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन और मांग के बीच अंतर को पूरा करने के लिए आयात आवश्यक हो जाता है। लेकिन एनएमईओ-ओपी जैसे मिशनों के ज़रिए भारत धीरे-धीरे इस अंतर को पाटने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में मजबूत प्रयास कर रहा है।
यह योजना न केवल देश को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि किसानों को स्थायी आय का भी एक सशक्त माध्यम प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र से रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की भी उम्मीद है।

