इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दशकों पुराने संघर्ष के समाधान की तलाश में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक हाई-लेवल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें विश्व के अधिकांश देशों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का मकसद था—एक स्थायी और व्यावहारिक समाधान की दिशा में वैश्विक प्रयासों को मजबूती देना। भारत ने भी इस मंच से दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) को ही शांति की एकमात्र राह बताते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखा।
भारत ने दिया शांति का संदेश
भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि “फिलिस्तीन मुद्दे पर केवल कागजों में समाधान नहीं, ज़मीनी स्तर पर व्यावहारिक हल ज़रूरी है। हमारी कोशिश बातचीत और कूटनीति के ज़रिए दो-राज्य समाधान को अमल में लाने पर होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि इजरायल और फिलिस्तीन को सीधे संवाद की टेबल पर लाया जाए।
नहीं है कोई दूसरा विकल्प: भारत
हरीश ने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास स्पष्ट है—इजरायल-फिलिस्तीन संकट का कोई और समाधान नहीं है। दो-राज्य समाधान ही वह रास्ता है, जिससे इस संघर्ष को समाप्त किया जा सकता है और क्षेत्र में स्थाई शांति लाई जा सकती है।
आउटकम डॉक्यूमेंट में अहम बातें
तीन दिवसीय इस उच्चस्तरीय सम्मेलन के अंत में 25 पेज का ‘न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन ऑन पीसफुल सॉल्यूशन टू द क्वेश्चन ऑफ फिलिस्तीन एंड द टू-स्टेट सॉल्यूशन’ जारी किया गया। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:
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गाजा में युद्ध तुरंत रोका जाए
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हमास सभी बंधकों को रिहा करे
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हमास को गाजा में शासन खत्म कर हथियार फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सौंपने होंगे
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युद्धविराम के बाद गाजा के प्रशासन के लिए तुरंत एक प्रशासनिक समिति का गठन हो
सऊदी अरब और फ्रांस की सह-अध्यक्षता
इस हाई-लेवल कॉन्फ्रेंस की सह-अध्यक्षता सऊदी अरब और फ्रांस ने की, जो इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया और यूरोप दोनों ही इस संघर्ष को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने के इच्छुक हैं।
निष्कर्ष:
भारत के रुख ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक शांति में उसकी प्रतिबद्धता कितनी मजबूत है। अब देखना होगा कि क्या यह अंतरराष्ट्रीय सहमति इजरायल और फिलिस्तीन को शांति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर पाएगी।

