पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU), लुधियाना ने अपने रिसर्च फॉर्म (गेट नंबर 4) पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और लाइव डेमो के माध्यम से जीएनएसएस आधारित ऑटो-स्टीयरिंग ट्रैक्टर प्रणाली का अनावरण किया। इस अवसर की अध्यक्षता कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने की। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यह अत्याधुनिक प्रणाली उपग्रह आधारित कंप्यूटर नियंत्रित तकनीक है, जो ट्रैक्टर संचालन के दौरान स्टीयरिंग को स्वचालित करती है। इस तकनीक में उपग्रह संकेतों, सेंसर और टचस्क्रीन कंसोल का उपयोग कर ट्रैक्टर को पूर्व निर्धारित रेखा पर सटीकता से चलाया जाता है। यह प्रणाली कम रोशनी में भी समान संचालन सुनिश्चित करती है, जिससे किसानों को थकान, दोहराव और अधूरे क्षेत्रों की समस्याओं से राहत मिलती है।
प्रणाली के मुख्य घटकों में जीएनएसएस रिसीवर, व्हील एंगल सेंसर और मोटर चालित स्टीयरिंग यूनिट शामिल हैं। ISOBUS-समर्थित कंसोल की मदद से ऑटो हेडलैंड टर्न, स्किप-रो फंक्शन और कस्टम टर्न पैटर्न जैसे एडवांस फीचर्स भी संभव हैं। ऑपरेटर एक बटन से मैनुअल और ऑटोमैटिक मोड में बदलाव कर सकता है।
पीएयू के फील्ड ट्रायल्स में इस तकनीक की प्रभावशीलता स्पष्ट हुई है। मैनुअल स्टीयरिंग के दौरान डिस्क हैरो, कल्टीवेटर, रोटावेटर और पीएयू-स्मार्ट सीडर जैसे उपकरणों में 3% से 12% तक ओवरलैप देखा गया, जबकि ऑटो-स्टीयरिंग सिस्टम के साथ यह घटकर लगभग 1% रह गया। मिस एरिया भी 2% से 7% से घटकर 1% से कम हो गए। ±3 सेमी की पास-टू-पास सटीकता ने संसाधनों के बेहतर उपयोग और फसल की समान स्थापना को सुनिश्चित किया।
कुलपति डॉ. गोसल ने कहा कि यह प्रणाली केवल नवाचार नहीं, बल्कि कृषि को लाभकारी, कुशल और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक जरूरी बदलाव है। उन्होंने बताया कि डिजिटल टूल्स न केवल उत्पादकता बढ़ाते हैं, बल्कि किसानों की शारीरिक मेहनत भी कम करते हैं।
डायरेक्टर रिसर्च डॉ. अजीमेर सिंह धत्त ने कहा कि मशीन लर्निंग, सेंसर नेटवर्क और नेविगेशन टेक्नोलॉजी जैसे नवाचार सीमित प्राकृतिक संसाधनों और बढ़ती लागत की चुनौती को ध्यान में रखते हुए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि ऑटो-स्टीयरिंग प्रणाली जैसी वैज्ञानिक और स्केलेबल तकनीक ही भारत के कृषि भविष्य की नींव है।
पीएयू के रजिस्ट्रार डॉ. ऋषि पाल सिंह (आईएएस) ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पटियाला में पीएयू के सेंसिंग तकनीक से युक्त रोपण मशीन को रिमोट से संचालित कर इसका राष्ट्रीय स्तर पर उद्घाटन किया था, जो पीएयू की अनुसंधान उपयोगिता को दर्शाता है।
कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन डॉ. मनजीत सिंह ने पीएयू की दूर से नियंत्रित दो-पहिया धान रोपण मशीन पर प्रकाश डाला, जिससे किसान छाया में रहते हुए रोपाई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस मशीन के उपयोग से 12% तक कार्यक्षमता में वृद्धि, 85% थकावट में कमी और 40% तक श्रम लागत में बचत दर्ज की गई है।
इसके साथ ही, पीएयू के जल प्रौद्योगिकी और प्रबंधन केंद्र द्वारा विकसित की जा रही IoT आधारित सटीक सिंचाई प्रणाली पर भी जानकारी साझा की गई। यह प्रणाली मिट्टी की नमी, जल स्तर और मौसम की जानकारी लेकर फसलों के लिए स्वचालित सिंचाई शेड्यूल तैयार करती है। संगरूर में हुए ट्रायल्स में जल उपयोग दक्षता में सुधार, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और ऊर्जा व श्रम लागत में गिरावट दर्ज की गई है।
कार्यक्रम के अंत में मीडिया प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देकर विश्वविद्यालय अधिकारियों ने पीएयू की डिजिटल कृषि रणनीति पर विस्तृत जानकारी दी और यह दिखाया कि कैसे पीएयू तकनीक के माध्यम से खेत स्तर पर बदलाव ला रहा है।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि पीएयू भारतीय कृषि में तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर रहा है — एक ऐसी खेती की ओर जो स्मार्ट, टिकाऊ और किसानों के लिए लाभकारी हो।

