शिविर के उद्घाटन अवसर पर एनएसएस समन्वयक डॉ. हरमीत सिंह सरलाच ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के उद्देश्यों तथा उसकी सामाजिक भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने स्वयंसेवकों को अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के माध्यम से समाज के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर डॉ. जी.एस. मंगत, अतिरिक्त अनुसंधान निदेशक, पीएयू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने छात्रों को अपने पेशेवर अनुभव साझा करते हुए वैज्ञानिक एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी। डॉ. मंगत ने कहा कि युवाओं की भागीदारी से ही जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटा जा सकता है।
डॉ. पी.के. किंगरा, विभागाध्यक्ष, जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विज्ञान विभाग, पीएयू और विशिष्ट अतिथि ने छात्रों को जलवायु परिवर्तन के कृषि पर प्रभाव के प्रति संवेदनशील बनाते हुए पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी व्यवहार और अनुकूलन रणनीतियों को अपनाने पर बल दिया।
छात्र कल्याण के संयुक्त निदेशक डॉ. के.एस. सूरी ने शिविर के आयोजन के लिए एनएसएस इकाई की सराहना करते हुए छात्रों से एनएसएस गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच छात्रों में सेवा भावना, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देते हैं, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कौशल विकास केंद्र की सहयोगी निदेशक डॉ. रूपिंदर कौर ने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी और छात्रों से आग्रह किया कि वे व्यावहारिक और उद्यमिता संबंधी कौशल विकसित कर अपने भविष्य को मजबूत बनाएं।
इस शिविर की समन्वयक भूमिका में NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राज कुमार पाल (कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, बॉयज़ यूनिट) हैं, जिन्होंने सप्ताह भर की गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की है। इन गतिविधियों में जनजागरूकता रैलियां, स्वच्छता अभियान, विशेषज्ञ व्याख्यान और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम शामिल हैं। कार्यक्रम के अंत में डॉ. पाल ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह शिविर न केवल छात्रों को सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करेगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करेगा।

