देशभर में नकली और अवमानक कीटनाशकों व खाद की बिक्री पर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। संसद में जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक कुल 3,56,091 कीटनाशक नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 9,088 नमूने अवमानक पाए गए। इन मामलों में दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।देशभर में 12,511 कीटनाशक निरीक्षक नियुक्त किए गए हैं, जो समय-समय पर फैक्ट्रियों और दुकानों से नमूने लेकर जांच करते हैं ताकि नकली और घटिया उत्पाद किसानों तक न पहुंचें।
नकली खाद बेचोगे तो होगी 7 साल तक की जेल!
सरकार ने उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए Fertilizer Control Order (FCO) 1985 लागू किया है। इसके तहत अगर कोई व्यापारी घटिया या नकली खाद बेचता है, तो 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। राज्य सरकारें नियमित रूप से दुकानों, गोदामों और निर्माण इकाइयों की जांच कर रही हैं।
शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नकली कीटनाशकों की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि देशभर से लगातार किसानों की ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि नकली कीटनाशकों से उनकी फसलें खराब हो रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि कीटनाशकों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह सिस्टम ऐसा होना चाहिए कि कोई भी किसान या डीलर परेशान न हो और यदि कोई धोखाधड़ी करे, तो उसे ट्रैक कर कड़ी कार्रवाई हो सके।
सरकार की प्राथमिकता: किसानों को गुणवत्तापूर्ण इनपुट देना
सरकार का लक्ष्य साफ है—देश के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले खाद, कीटनाशक और बीज उपलब्ध कराना, जिससे उनकी फसलें सुरक्षित रहें और उत्पादन बढ़े। नकली कृषि इनपुट के खिलाफ यह कड़ा एक्शन भारतीय कृषि को धोखे से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष:
मोदी सरकार अब नकली कीटनाशक और खाद बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई के मूड में है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण इनपुट देने की दिशा में यह बड़ा कदम है, जिससे भारतीय खेती को नई ताकत मिलेगी।

