भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्रांति 4.0 की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और मशीन लर्निंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब खेती अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बन रही है।
‘किसान ई-मित्र’ – किसानों का डिजिटल साथी
सरकार द्वारा विकसित ‘किसान ई-मित्र‘ एक वॉयस-बेस्ड एआई चैटबॉट है, जो PM-किसान सम्मान निधि योजना से संबंधित किसानों के सवालों के जवाब देता है। यह प्रणाली 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और अब अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी देने की दिशा में भी विकसित हो रही है।
- अब तक 95 लाख से अधिक सवालों के जवाब दिए जा चुके हैं।
- प्रतिदिन औसतन 20,000 से अधिक किसान इसका उपयोग कर रहे हैं।
कीट निगरानी प्रणाली – फसल बचाने की तकनीक
नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम के माध्यम से अब किसानों को कीटों से नुकसान कम करने में मदद मिल रही है।
- यह प्रणाली AI और मशीन लर्निंग के जरिए फसल पर कीट हमलों का पूर्वानुमान लगाती है।
- किसान अपने मोबाइल से कीटों की तस्वीरें खींचकर भेज सकते हैं, जिससे समय पर सलाह और कार्रवाई संभव होती है।
- इस तकनीक में अभी 61 फसलें और 400+ कीट संयोजन शामिल हैं।
- 10,000 से अधिक कृषि विस्तार अधिकारी इसका उपयोग कर रहे हैं।
सैटेलाइट और डेटा से फसल निगरानी
- धान और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों की सेहत की निगरानी अब सैटेलाइट इमेजरी, मिट्टी की नमी, और मौसम डेटा के माध्यम से की जा रही है।
- इससे फसल की वृद्धि, रोग का पता और संभावित उत्पादन का सटीक मूल्यांकन संभव हो पाया है।
डिजिटल कृषि मिशन और राज्यों को सहायता
- नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान इन एग्रीकल्चर (NeGPA) के तहत राज्यों को डिजिटल कृषि परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसमें AI, IoT, सेंसर-आधारित तकनीक का उपयोग शामिल है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से उर्वरकों की बचत
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर 12 महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की जांच की जाती है।
- इसके आधार पर किसानों को उचित उर्वरक सिफारिशें दी जाती हैं, जिससे उपज बेहतर होती है और उर्वरक की लागत में बचत होती है।
‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना – सिंचाई में क्रांति
- सरकार द्वारा 2015-16 से शुरू की गई यह योजना खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है।
- इसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- इसके अंतर्गत सीमांत और छोटे किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% सब्सिडी दी जा रही है।
- इससे पानी की बचत, उर्वरकों का कम उपयोग, कम श्रम खर्च और कुल आय में वृद्धि होती है।

