केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में लगातार अहम कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत 2025-26 के लिए 22 प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के लिए 2025-26 में बजटीय आवंटन ₹1.37 लाख करोड़ किया गया है, जो 2013-14 के ₹21,933 करोड़ के मुकाबले 6 गुना से अधिक की बढ़ोतरी है। यह सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत है।
MSP में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
सरकार ने वर्ष 2018-19 से यह सिद्धांत अपनाया है कि सभी फसलों के MSP को उनकी उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक रखा जाए। इसी नीति के तहत खरीफ और रबी फसलों सहित वाणिज्यिक फसलों के MSP में वर्ष दर वर्ष बढ़ोतरी की जा रही है।
कुछ प्रमुख फसलों के 2025-26 के MSP इस प्रकार हैं:
- धान (सामान्य किस्म): ₹2369 प्रति क्विंटल
- ज्वार (हाइब्रिड): ₹3699 प्रति क्विंटल
- अरहर (तूर): ₹8000 प्रति क्विंटल
- मूंग: ₹8768 प्रति क्विंटल
- सोयाबीन (पीला): ₹5328 प्रति क्विंटल
- सरसों: ₹5950 प्रति क्विंटल
- गेहूं: ₹2425 प्रति क्विंटल
- जूट: ₹5650 प्रति क्विंटल
- नारियल (कोपरा-मिलिंग): ₹11,582 प्रति क्विंटल
किसानों के हित में संचालित प्रमुख योजनाएं:
MSP के साथ-साथ केंद्र सरकार द्वारा छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
- पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना (PDMC)
- राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF)
- डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन
- नमो ड्रोन दीदी योजना
- फसल विविधिकरण कार्यक्रम (CDP)
- 10,000 नए एफपीओ के गठन और प्रोत्साहन योजना
MSP को और प्रभावी बनाने के लिए समिति गठित
MSP प्रणाली को और पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए 12 जुलाई 2022 को एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य CACP (कृषि लागत एवं मूल्य आयोग) को अधिक स्वायत्तता देना और कृषि विपणन प्रणाली को सुदृढ़ करना है, ताकि किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो सके — चाहे वह घरेलू हो या निर्यात बाजार।

