प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अब फसलों की सेहत की निगरानी और नुकसान के आकलन के लिए तकनीक का सीधा उपयोग शुरू हो गया है। ‘CROPIC’ (Collection of Real Time Observations and Photographs of Crops) नामक एक डिजिटल एप्लिकेशन को जुलाई 2024 से पायलट आधार पर देशभर में शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से किसानों और फील्ड कोऑर्डिनेटर्स द्वारा स्मार्टफोन से फसलों की जियो-टैग की गई तस्वीरें अपलोड की जा रही हैं।
इस महत्वपूर्ण जानकारी को आज राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने एक लिखित उत्तर के माध्यम से साझा किया।
क्या है ‘CROPIC’ और कैसे करेगा काम?
‘CROPIC’ ऐप का मुख्य उद्देश्य है:
- फसलों की ग्राउंड लेवल मॉनिटरिंग के लिए समयानुसार (time-series) जियो-टैग्ड फोटोज एकत्र करना।
- बीमित फसलों का प्रमाणीकरण (validation) करना।
- स्थानीय आपदाओं जैसे ओलावृष्टि, तेज बारिश या कीट हमलों के बाद फसल क्षति का आकलन करना।
ऐप के माध्यम से किसान या क्षेत्रीय अधिकारी अपने मोबाइल फोन से फसल की स्थिति की तस्वीरें खींचकर अपलोड करते हैं। ये तस्वीरें समय, स्थान और फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर प्रमाणिक होती हैं, जिससे बीमा कंपनियों और सरकार को यह तय करने में मदद मिलती है कि बीमित फसल में कितना नुकसान हुआ है।
क्यों है ये पहल अहम?
- फसल बीमा दावा निपटान में पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित होगी।
- किसानों की भागीदारी सीधे इस प्रक्रिया में बढ़ेगी, जिससे उनकी शिकायतें कम होंगी।
- स्थानीय आपदाओं के मामले में तत्काल सबूत उपलब्ध होंगे, जिससे दावा प्रक्रिया में देरी नहीं होगी।
- बीमा कंपनियों के लिए फर्जी दावों की पहचान करना आसान होगा।
भविष्य की संभावनाएं:
सरकार की योजना है कि CROPIC ऐप को पूरे देश में बड़े स्तर पर लागू किया जाए, जिससे सभी राज्यों के किसान इसका लाभ उठा सकें। इस तकनीक के जरिए किसानों को समय पर बीमा लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी और उन्हें अपने नुकसान का उचित मुआवजा मिल सकेगा।
CROPIC पहल, डिजिटल इंडिया और स्मार्ट एग्रीकल्चर की दिशा में एक अहम कदम है, जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को और अधिक किफायती, भरोसेमंद और किसान हितैषी बनाने में मदद करेगा।

