उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा तिलहन और दलहन फसलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर अब दिखने लगा है। किसानों को अनुदान पर बीज, यंत्र और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे सहयोग के दम पर खरीफ की फसलों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। यूपी कृषि विभाग के मुताबिक 21 जुलाई 2025 तक खरीफ सीजन में तिल, मूंगफली, सोयाबीन, अरहर समेत धान और मक्के के रकबे में भारी इजाफा हुआ है।
तिलहन फसलों में ऐतिहासिक उछाल
कृषि निदेशक डॉ. पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि तिल की खेती का रकबा पिछले साल के 180.26 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 303 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है। यानी डेढ़ गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी।
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सोयाबीन का रकबा भी 34.12 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 40 हजार हेक्टेयर हो गया है।
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मूंगफली का क्षेत्रफल 204 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 218 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
दलहन में अरहर किसानों की पहली पसंद
खरीफ सीजन की मुख्य दाल अरहर की खेती का रकबा 184 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 273 हजार हेक्टेयर हो गया है।
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मूंग भी 30 हजार से बढ़कर 32 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
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हालांकि उर्द की खेती अभी भी पीछे बनी हुई है।
धान, मक्का और कपास की ओर भी रुझान
राज्य में सिर्फ दलहन-तिलहन ही नहीं, बल्कि अनाज और नकदी फसलों की खेती में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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धान का रकबा 4193 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 5546 हजार हेक्टेयर तक पहुंचा है।
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मक्का 636 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 701 हजार हेक्टेयर हो गया।
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कपास की खेती में भी किसानों की दिलचस्पी बढ़ी है, इसका रकबा 7 हजार से 18 हजार हेक्टेयर तक हो गया।
कुल रकबा 8262 हजार हेक्टेयर
2024 में खरीफ फसलों का कुल रकबा 6574 हजार हेक्टेयर था, जो 2025 में बढ़कर 8262 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है। यह वृद्धि राज्य की खेती में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
सरकार की रणनीति रंग ला रही
सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं, जैसे—
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अनुदान पर बीज व कृषि यंत्र
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रोग-प्रतिरोधक उन्नत किस्मों का वितरण
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किसानों को नियमित ट्रेनिंग
इन प्रयासों का सीधा असर प्रदेश की कृषि व्यवस्था पर पड़ा है।

