भारत सरकार के संचार मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय डाक विभाग (DoP) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय शाखा एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत करते हुए एक गैर-प्रकटीकरण समझौते (NDA) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य भारत में आने वाली प्रेषित धनराशियों (इनवर्ड रेमिटेंस) को अधिक सुविधाजनक, किफायती और सुरक्षित बनाना है।
यह साझेदारी दो प्रमुख तकनीकी मंचों — यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) इंटरकनेक्शन प्लेटफॉर्म — का उपयोग कर एक सशक्त अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली का निर्माण करेगी, जिससे प्रवासी भारतीयों को अपने परिवारों को पैसा भेजने में और भी सरलता, विश्वसनीयता और सुविधा प्राप्त होगी।
समझौते पर भारतीय डाक विभाग के अंतरराष्ट्रीय संबंध और वैश्विक व्यापार के उपमहानिदेशक श्री एल. के. दाश और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड के सीईओ श्री रितेश शुक्ला ने आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए।
इस पहल के प्रमुख लाभ:
- किफायती प्रेषण सेवा: UPI और UPU-IP के एकीकरण से प्रेषण शुल्क में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों के लिए अपने परिवारों को पैसा भेजना और अधिक सस्ता होगा।
- सुरक्षित लेन-देन: UPI की सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था और डाक विभाग की विश्वसनीयता के चलते यह सेवा भेजने वालों और प्राप्तकर्ताओं दोनों के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित रहेगी।
- व्यापक पहुँच: वैश्विक डाक नेटवर्क का लाभ उठाते हुए यह सेवा उन क्षेत्रों तक पहुँचेगी जहाँ पारंपरिक बैंकिंग सेवाएं सीमित हैं, जिससे वित्तीय समावेशन को नया विस्तार मिलेगा।
- रियल-टाइम ट्रांसफर: अत्याधुनिक तकनीक आधारित इस व्यवस्था में धनराशि का स्थानांतरण वास्तविक समय (रियल टाइम) में होगा, जिससे भारत में बैठे परिवारों को त्वरित लाभ मिल सकेगा।
इस अवसर पर श्री एल. के. दाश ने कहा, “NIPL के साथ यह साझेदारी हमारे उस संकल्प का हिस्सा है जिसके तहत हम देश के नागरिकों — विशेष रूप से प्रवासी भारतीयों — को किफायती और सुलभ वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
वहीं, NIPL के सीईओ श्री रितेश शुक्ला ने कहा, “हम UPI को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और इस साझेदारी के जरिए करोड़ों भारतीयों के लिए रेमिटेंस प्रक्रिया को सरल और समावेशी बना सकेंगे।”
यह सहयोग न केवल भारत में रेमिटेंस सिस्टम को आधुनिक बनाएगा, बल्कि देश के आर्थिक समावेशन अभियान को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

