देश में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार लगातार व्यापक रणनीतियों पर काम कर रही है। वर्ष 2016 में इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया, जिसने किसानों की समग्र उन्नति के लिए सात प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए। इनमें शामिल हैं: फसल और पशुधन उत्पादकता में वृद्धि, उत्पादन लागत में कमी, फसल विविधीकरण, फसल सघनता, लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना, और गैर-कृषि रोजगार की दिशा में जनशक्ति का स्थानांतरण।
इस दिशा में भारत सरकार ने कई योजनाओं और कार्यक्रमों को गति दी है। कृषि बजट में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए इसे वर्ष 2013-14 के ₹21,933 करोड़ से बढ़ाकर 2025-26 में ₹1,27,290 करोड़ किया गया है। इसके अतिरिक्त, किसानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), पीएम-आशा, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन शामिल हैं।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) जैसे कार्यक्रमों के अंतर्गत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ सुनिश्चित किया गया है। मूल्य समर्थन योजना (PSS), मूल्य अंतर भुगतान योजना (PDPS), और बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) जैसी योजनाएं किसानों को बाजार में मूल्य गिरावट के दौरान सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं।
सरकार द्वारा प्रिसिशन खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे बिना पर्यावरणीय नुकसान के पैदावार और आय में वृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कर किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण और प्रदर्शन भी दिया जा रहा है।
डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत किसानों की सुविधा के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जैसे एग्रीस्टैक, किसान रजिस्ट्री, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और फसल बुआई डेटाबेस तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और IoT जैसी तकनीकों का उपयोग कर कृषि को स्मार्ट और सटीक बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग, पैकेजिंग यूनिट्स आदि की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक ₹8258 करोड़ की स्वीकृति के साथ 2454 कोल्ड स्टोरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। बागवानी क्षेत्र में भी समग्र विकास हेतु पैक हाउस, राइपनिंग चैंबर्स और रिफर ट्रांसपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को समर्थन दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार का यह समग्र और समन्वित दृष्टिकोण किसानों की आय को बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण क्षेत्र में समृद्धि लाने की दिशा में एक सशक्त पहल है। इन प्रयासों के जरिए किसानों को न केवल आर्थिक संबल मिल रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी ठोस प्रगति हो रही है।

