देश में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (एनएमएनएफ) अब व्यापक स्तर पर असर दिखा रहा है। इस मिशन के तहत पूरे भारत में लगभग 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 15,000 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर स्थापित किए जा चुके हैं, जहां लगभग 125 किसानों के समूह मिलकर प्रति क्लस्टर करीब 50 हेक्टेयर के क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती की इस मुहिम को सफल बनाने के लिए सरकार ने जागरूकता, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता दी है। इस दिशा में 3,900 से अधिक वैज्ञानिकों, किसान मास्टर प्रशिक्षकों (एफएमटी) और सरकारी अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही, 28,000 से अधिक सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (सीआरपी) की पहचान की गई है, जो किसानों को खेत स्तर पर निरंतर मार्गदर्शन दे रहे हैं। इसके अलावा, 806 कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय और स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थान भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं।
प्रशिक्षण और प्रदर्शन को और सशक्त बनाने के लिए अब तक 1,100 प्राकृतिक कृषि मॉडल फार्म तैयार किए जा चुके हैं, जहां किसान और सीआरपी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। इस योजना के तहत प्रति किसान प्रति वर्ष 4,000 रुपये प्रति एकड़ (अधिकतम एक एकड़ तक) दो वर्षों तक की सहायता दी जा रही है। अब तक 10 लाख से अधिक किसानों को इस मिशन में नामांकित किया जा चुका है, जो देश में एक बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है।
किसानों को अपनी प्राकृतिक उपज को बाजार तक पहुंचाने में मदद करने के लिए सरल और भरोसेमंद प्रमाणन प्रणाली भी लागू की गई है। राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक कृषि केंद्र (एनसीओएनएफ), गाजियाबाद के जरिए पीजीएस-भारत (भागीदारी गारंटी प्रणाली) के अंतर्गत प्राकृतिक कृषि प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल सके।
मिशन की प्रगति को ट्रैक करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल (https://naturalfarming.dac.gov.in/) विकसित किया गया है, जहां मिशन की सभी गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है।
इसके साथ ही, किसानों की सहायता के लिए जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (बीआरसी) की स्थापना भी की जा रही है। ये केंद्र उन किसानों के लिए प्राकृतिक कृषि इनपुट जैसे जीवामृत, घनजीवामृत आदि तैयार करके उपलब्ध कराते हैं, जो स्वयं यह इनपुट नहीं बना पाते। बीआरसी किसानों को प्रशिक्षण, जानकारी और खेत पर प्रदर्शन भी उपलब्ध कराते हैं। अब तक 7934 बीआरसी की पहचान की गई है, जिनमें से 2045 बीआरसी पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा संचालित किया जा रहा है।
सरकार की यह पहल न केवल खेती की लागत को घटाने, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए भी अहम मानी जा रही है। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन धीरे-धीरे किसानों के बीच विश्वास अर्जित कर रहा है और देश को एक टिकाऊ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर कृषि पद्धति की ओर ले जा रहा है।

