भारत सरकार देश में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, ताकि खेती को अधिक उत्पादक, आधुनिक और लाभकारी बनाया जा सके। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि सरकार छोटे और सीमांत किसानों तक मशीनों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कई वित्तीय और नीतिगत उपाय कर रही है।
देश में औसत कृषि मशीनीकरण स्तर 45% तक पहुंचा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वर्ष 2020-21 के आकलन के अनुसार, भारत में विभिन्न फसलों और कृषि कार्यों में मशीनीकरण का औसत स्तर 45% है।
- बीज की क्यारी तैयार करने में मशीनीकरण 70%
- बुवाई/रोपण/आरोपण में 40%
- निराई और अंतर-संवर्धन में 33%
- कटाई और थ्रेसिंग में 34%
हालांकि यह आंकड़े क्षेत्र विशेष, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, फसलों और सिंचाई सुविधाओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
कार्यबल में बदलाव की प्रक्रिया जारी
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, कृषि क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की संख्या में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है, जो देश में विकास और शहरीकरण की प्रक्रिया का संकेत है।
- 2020-21 में कृषि में कार्यरत श्रमिकों का प्रतिशत था 5%
- 2021-22 में यह घटकर हुआ 5%
- 2022-23 में यह थोड़ा बढ़कर हुआ 8%
कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीनरी बैंक को बढ़ावा
सरकार द्वारा कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM) के अंतर्गत मशीनों की खरीद और साझा उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं।
- व्यक्तिगत मशीन खरीद पर किसानों को 40% से 50% तक की सब्सिडी दी जाती है।
- किराए पर मशीनें देने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की स्थापना पर 40% तक की सब्सिडी, अधिकतम 250 लाख रुपये की परियोजना लागत पर।
- कृषि मशीनरी बैंक (FMB) की स्थापना पर 80% तक की सब्सिडी, अधिकतम 30 लाख रुपये की लागत पर।
- पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह सहायता दर 95% तक है, जिससे इन क्षेत्रों में मशीनीकरण को विशेष बढ़ावा मिल रहा है।
टैक्स व्यवस्था और सरकारी समर्थन
हस्त चालित और पशु-चालित कृषि औजार GST मुक्त हैं, जबकि खेत तैयार करने और कटाई से जुड़ी मशीनों पर 12% जीएसटी, और कृषि उत्पादों की सफाई व छंटाई मशीनों पर 18% जीएसटी लागू है। हालांकि, सरकार राज्यों के सहयोग से इस क्षेत्र में उपयुक्त नीतियों, योजनाओं और बजटीय प्रावधानों के माध्यम से किसानों का सहयोग कर रही है।
एफपीओ और स्टार्टअप को भी मिल रहा बढ़ावा
सरकार किसान उत्पादक संगठन (FPO) और कृषि स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिससे किसानों की आय बढ़े, रोजगार के नए अवसर बनें और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उद्यमिता को बढ़ावा मिले।

