देशभर में मक्का की खेती एक बार फिर सुर्खियों में है। जुलाई 2025 के तीसरे हफ्ते तक मक्का की बुवाई में 15% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 21 जुलाई 2025 तक मक्का की बुवाई 71.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 61.73 लाख हेक्टेयर था।
राज्यों में बंपर बुवाई
देश के अधिकांश राज्यों में मक्का की बुवाई में उत्साहजनक इजाफा देखा गया है:
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कर्नाटक: देश का सबसे बड़ा मक्का उत्पादक राज्य, जहां बुवाई 15.23 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है (पिछले साल 13.87 लाख हेक्टेयर)
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महाराष्ट्र: 12.35 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 9.75 लाख हेक्टेयर)
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तेलंगाना: 4.49 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 2.89 लाख हेक्टेयर)
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राजस्थान: 9.34 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 9.01 लाख हेक्टेयर)
हालांकि गुजरात में मक्का क्षेत्र घटकर 2.19 लाख हेक्टेयर रह गया है क्योंकि वहां के किसान मूंगफली की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
क्यों बढ़ रही है मक्का की खेती?
कृषि विश्लेषक राहुल चौहान के अनुसार, मक्का की मांग चारा (feed) और इथेनॉल उत्पादन उद्योग में लगातार बढ़ रही है। साथ ही किसानों को पिछले दो वर्षों में मक्का की अच्छी कीमत भी मिली है, खासकर सोयाबीन और दालों की तुलना में। यही वजह है कि किसान मक्का को अब एक फायदेमंद फसल मानने लगे हैं।
बुवाई और उत्पादन में नया रिकॉर्ड
खरीफ 2024 में मक्का की बुवाई 84.30 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई थी।
रबी (27.24 लाख हेक्टेयर) और गर्मी सीजन (8.4 लाख हेक्टेयर) को मिलाकर 2024-25 में कुल मक्का क्षेत्रफल 120.17 लाख हेक्टेयर हो गया है।
उत्पादन की बात करें तो यह साल 2024-25 में 42.28 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल 37.66 मिलियन टन था।
मांग तेज, फिर भी आयात जरूरी
पशुपालन क्षेत्र में 8-10% की ग्रोथ के चलते मक्का की घरेलू मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है।
CLFMA ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिव्या कुमार गुलाटी के अनुसार, इस बढ़ती मांग की भरपाई के लिए भारत को 2024-25 में 9.7 लाख टन मक्का आयात करना पड़ा, जो पिछले साल के मुकाबले छह गुना ज्यादा है।

