सतत और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम पहल के तहत एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी (ATMA), मंडी द्वारा किसानों के लिए एक एक्सपोज़र विज़िट कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम परियोजना निदेशक राकेश पटियाल के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें सुंदरनगर ब्लॉक की सेरीकोठी और मलोह पंचायतों से जुड़े लगभग 70 किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के तहत भाग लेने वाले किसानों को बिलासपुर ज़िले के उन खेतों में ले जाया गया, जहाँ स्थानीय किसान भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP) के तहत सफलतापूर्वक खेती कर रहे हैं। इस विज़िट का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की व्यावहारिक जानकारी देना और उनके अनुभव से सीखने का अवसर प्रदान करना था।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के अनेक फायदों के बारे में बताया, जैसे कि:
- रसायन-मुक्त और स्वास्थ्यवर्धक फसलों का उत्पादन
- मिट्टी की उर्वरता में सुधार
- मल्चिंग और जैविक तकनीकों के माध्यम से जल संरक्षण
- कम लागत और अधिक मुनाफा देने वाली खेती
- पर्यावरण अनुकूल पद्धतियाँ, जो प्रदूषण को कम करती हैं
- बिना रासायनिक दवाओं के कीट व रोग नियंत्रण
- दीर्घकालिक आत्मनिर्भर और टिकाऊ खेती की ओर अग्रसरता
इस एक्सपोज़र विज़िट ने किसानों को प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक लाभों से अवगत कराया और उन्हें अपनी खेती में इन विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें बिलासपुर और सुंदरनगर के किसानों ने अपने अनुभव, चुनौतियाँ और सफलताएँ साझा कीं। इस चर्चा से आपसी सीख और भविष्य में सहयोग की संभावनाएँ भी सामने आईं।
इस अवसर पर उप परियोजना निदेशक हितेंद्र ठाकुर, संजय कुमार, और ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर लेखराज उपस्थित रहे, जिन्होंने विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया और किसानों को प्रोत्साहित किया।
यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है किसानों को आत्मनिर्भर, पर्यावरण-जागरूक और आर्थिक रूप से सक्षम बनाना।

