हिमाचल प्रदेश में जारी मानसून की मार ने बागवानी और कृषि क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है, जिससे अब तक कुल ₹40 करोड़ से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया है। इनमें से अकेले बागवानी विभाग को ₹27 करोड़ से अधिक और कृषि विभाग को ₹11 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
इस प्राकृतिक आपदा में मंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं ने फसलों और खेतों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। बागवानी विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, मंडी में 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की बागवानी फसलें तबाह हो गईं, जिससे करीब 1,270 बागवान प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया, “सबसे अधिक क्षति सेब उत्पादक क्षेत्रों में हुई है, जहाँ न केवल फसलें, बल्कि सेब के पेड़ भी नष्ट हो गए हैं।”
बागवानी क्षेत्र में हुए ₹27 करोड़ से अधिक के कुल नुकसान में से ₹25 करोड़ अकेले मंडी जिले में हुआ है, जो इस आपदा की भयावहता को दर्शाता है।
कृषि क्षेत्र की बात करें तो यहां भी मंडी जिला ही सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। कृषि विभाग के अनुसार, कुल ₹11 करोड़ से अधिक के नुकसान में से ₹8 करोड़ से अधिक का नुकसान मंडी जिले में हुआ है। एक कृषि अधिकारी ने बताया, “यह नुकसान मुख्य रूप से उस भूमि से जुड़ा है जहाँ किसानों ने हाल ही में फसलें बोई थीं, लेकिन बारिश और भूस्खलन के कारण भूमि ही बह गई।”
राज्य सरकार और संबंधित विभागों द्वारा क्षति का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही मुआवजा योजनाओं के तहत राहत वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
यह स्थिति प्रदेश के किसानों और बागवानों के लिए आर्थिक और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए फसल बीमा, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
राज्य सरकार से मांग की जा रही है कि प्रभावित किसानों को तत्काल राहत, ऋण माफी, और दोबारा खेती के लिए तकनीकी व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे इस प्राकृतिक आपदा से उबर सकें और फिर से जीवन को पटरी पर ला सकें।

