पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के स्किल डेवलपमेंट सेंटर द्वारा “लैंडस्केपिंग के लिए सजावटी पौधों के उपयोग” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 29 किसानों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों और उद्यान प्रेमियों को सजावटी पौधों के महत्व और उनके विविध उपयोगों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एसोसिएट डायरेक्टर (स्किल डेवलपमेंट) डॉ. रूपिंदर कौर ने कहा, “सजावटी पौधे केवल सौंदर्यवर्धन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पर्यावरण को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। लोगों को इनके सही उपयोग और देखभाल के बारे में जानकारी देना समय की आवश्यकता है।”
कोर्स समन्वयक डॉ. कुलवीर कौर ने बताया कि आजकल घर, छत, खेत और आसपास के क्षेत्रों में सजावटी पौधों का उपयोग लैंडस्केपिंग के लिए तेजी से बढ़ रहा है। इससे न केवल सुंदरता बढ़ती है, बल्कि मानसिक शांति और वातावरण में भी सुधार आता है।
फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग विभाग के प्रमुख डॉ. परविंदर सिंह ने कहा कि PAU का बागवानी से संबंधित यह प्रशिक्षण कोर्स फूलों और बागवानी प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों और बेरोजगार युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने कहा कि बागवानी एक ऐसा क्षेत्र है जो सौंदर्य, स्वास्थ्य और रोजगार — तीनों का संगम प्रस्तुत करता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. सिमरत सिंह, डॉ. आर.के. दुबे, डॉ. रंजीत सिंह, डॉ. तान्या ठाकुर, डॉ. मधु बाला, डॉ. शालिनी झांझी और डॉ. अमन शर्मा ने विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया और प्रतिभागियों को सजावटी पौधों की किस्में, उनकी देखभाल, सही स्थान चयन, और रोग नियंत्रण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम का समापन डॉ. लवलीश गर्ग (एक्सटेंशन साइंटिस्ट) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत किसानों और आम नागरिकों को स्वच्छ, सुंदर और हरित परिवेश की ओर प्रेरित किया जा रहा है। PAU का मानना है कि सजावटी पौधों के माध्यम से न केवल वातावरण सुंदर बनाया जा सकता है, बल्कि यह एक स्थायी आजीविका का माध्यम भी बन सकता है।

