महाराष्ट्र विधानमंडल का तीन हफ्तों तक चला मॉनसून सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। इस सत्र में कुल 16 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए, जिनमें कानून-व्यवस्था से लेकर किसानों के कल्याण और खनिज विकास तक के अहम प्रस्ताव शामिल थे। सत्र समापन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बातचीत की और अपनी सरकार के कामकाज को ‘संतोषजनक’ बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महायुति सरकार किसानों की कर्जमाफी को लेकर गंभीर है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी समाधान है। “हमने कृषि संकट को जड़ से खत्म करने के लिए दीर्घकालिक समाधान सुझाने वाली एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है,” फडणवीस ने बताया।
ये विधेयक बने चर्चा का केंद्र:
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विशेष जन सुरक्षा विधेयक: नक्सलवाद से निपटने के लिए
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एससी/एसटी आयोग को वैधानिक दर्जा
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नासिक कुंभ के लिए अलग प्राधिकरण
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गढ़चिरौली खनन विकास प्राधिकरण का गठन
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मादक पदार्थ अपराधों को मकोका में लाना
इसके अलावा 57,000 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांगों को भी मंजूरी दी गई।
विपक्ष पर तीखा हमला:
फडणवीस ने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा, “विपक्ष बिना प्रमाण के आरोप लगा रहा है। यह उनकी ‘गोली मारो और भाग जाओ’ रणनीति का हिस्सा है।” उन्होंने कहा कि पूछे गए सवालों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था और यह स्पष्ट करता है कि उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है।
93% बारिश, खरीफ सीजन की उम्मीदें बरकरार:
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक महाराष्ट्र में मॉनसून सीजन की 93% बारिश हो चुकी है। “जलाशयों में पर्याप्त पानी है और खरीफ की फसल का मौसम अच्छा रहने की उम्मीद है,” उन्होंने कहा।
विवादों पर सरकार का रुख:
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इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर: फडणवीस ने कहा, “यह नामकरण पुराने नाम को पुनर्स्थापित करना है। जयंत पाटिल से इस बारे में पूछने का सवाल ही नहीं उठता।”
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संरक्षक मंत्री नियुक्ति विवाद: नासिक और रायगढ़ में संरक्षक मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर शिवसेना और राकांपा आमने-सामने हैं, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन विकास रुका नहीं है।
विपक्ष की आलोचना और सरकार की सफाई:
विपक्ष ने विशेष सुरक्षा विधेयक को “दमनकारी और अस्पष्ट” करार दिया। इस पर फडणवीस का कहना था कि कई सदस्य विधेयक को पढ़े बिना ही टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस विधेयक पर अब तक 12,500 आपत्तियां और सुझाव मिले हैं, जिनकी गंभीरता से समीक्षा की जाएगी।

