हरियाणा में मॉनसून अब किसानों के लिए मुसीबत बनकर बरस रहा है। हिसार और भिवानी जिलों में भारी बारिश के चलते जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है, जिससे किसानों की खरीफ फसलों पर संकट मंडराने लगा है। औसत से कहीं अधिक हुई बारिश ने खेतों को तालाब में तब्दील कर दिया है और धान समेत अन्य मौसमी फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं।
12 गांव बुरी तरह प्रभावित
‘दि ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हिसार और भिवानी के 12 से अधिक गांव इस जल संकट से जूझ रहे हैं। इनमें धनाना, मिताथल, तालु, चांग, सुखपुरा, बलियाली, घुसकानी, खरक, सिसई, बांडहेड़ी और आदमपुर जैसे गांव शामिल हैं। अकेले चांग गांव में 1,100 एकड़ खेत जलमग्न हो चुका है। आलमपुर में 1,050 एकड़, घुसकानी में 900 एकड़, बलियाली में 850 एकड़ और बांडहेड़ी में 500 एकड़ फसल पानी में डूबी हुई है।
चार फुट तक भरा पानी, बुआई ठप
कई इलाकों में जलस्तर चार फुट तक पहुंच चुका है। किसान रोपाई दोबारा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे पूरे सीजन की फसल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। किसान चेतावनी दे चुके हैं कि यदि एक सप्ताह के भीतर जलनिकासी नहीं हुई, तो रबी सीजन की तैयारी भी नहीं हो सकेगी।
किसानों का धरना, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
भिवानी में अखिल भारतीय किसान सभा ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर प्रभावित इलाकों में तत्काल जल निकासी मशीनों की तैनाती और मुआवजे की मांग की। प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया, जिसके बाद उपायुक्त ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बाजरा से कपास तक हर फसल को नुकसान
हिसार के आदमपुर क्षेत्र के विधायक चंद्र प्रकाश ने सिसवाल, आदमपुर, लाडवी, महलसरा और कोहली गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। किसानों ने उन्हें बताया कि ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, ग्वार और मूंग जैसी फसलें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। विधायक ने फसल नुकसान के तुरंत सर्वे और मुआवजे की मांग अधिकारियों के समक्ष रखी।
सिस्टम पर सवाल, जल निकासी पर सरकार घिरी
किसान संगठनों ने हर साल जल निकासी व्यवस्था की नाकामी को लेकर सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि हर साल यही संकट आता है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।

