कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा भरने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बुधवार को ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना‘ को मंजूरी दे दी है। यह योजना आगामी 6 वर्षों तक चलेगी और इस पर कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च किया जाएगा। हर साल 24,000 करोड़ रुपये खर्च कर देश के 100 जिलों में खेती को सशक्त बनाया जाएगा।
क्या है योजना का मकसद?
यह मेगा योजना खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य के साथ लाई गई है। योजना के तहत:
योजना के तहत कम उत्पादन, कम लोन वितरण और कम फसली तीव्रता वाले जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। हर राज्य से कम से कम एक जिला योजना में शामिल होगा। 117 संकेतकों के आधार पर जिलों की हर महीने प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसकी निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड, नीति आयोग और नोडल अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
प्रगतिशील किसान होंगे योजना का हिस्सा
योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां बनाई जाएंगी। जिला योजनाएं फसल विविधीकरण, जल-मिट्टी संरक्षण और आत्मनिर्भर कृषि मॉडल पर आधारित होंगी। खास बात यह है कि इन समितियों में प्रगतिशील किसानों को भी सदस्य बनाया जाएगा।
क्या होंगे फायदे?
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना सिर्फ एक स्कीम नहीं, बल्कि खेती के भविष्य को बदलने वाली योजना साबित हो सकती है। इससे स्थानीय आजीविका मजबूत होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और राष्ट्रीय कृषि संकेतकों में सुधार देखने को मिलेगा।
क्या है योजना का मकसद?
यह मेगा योजना खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य के साथ लाई गई है। योजना के तहत:
- फसल विविधता और उत्पादन बढ़ाने पर जोर
- प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन
- फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता में सुधार
- सिंचाई सुविधाओं का सशक्तीकरण
- किसानों को सस्ता और सुलभ कृषि लोन उपलब्ध कराना
योजना के तहत कम उत्पादन, कम लोन वितरण और कम फसली तीव्रता वाले जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। हर राज्य से कम से कम एक जिला योजना में शामिल होगा। 117 संकेतकों के आधार पर जिलों की हर महीने प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसकी निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड, नीति आयोग और नोडल अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
प्रगतिशील किसान होंगे योजना का हिस्सा
योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां बनाई जाएंगी। जिला योजनाएं फसल विविधीकरण, जल-मिट्टी संरक्षण और आत्मनिर्भर कृषि मॉडल पर आधारित होंगी। खास बात यह है कि इन समितियों में प्रगतिशील किसानों को भी सदस्य बनाया जाएगा।
क्या होंगे फायदे?
- खेती में तकनीक और आधुनिकता का विस्तार
- किसानों की आय में इजाफा
- स्थानीय स्तर पर रोजगार और संसाधनों का विकास
- आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना सिर्फ एक स्कीम नहीं, बल्कि खेती के भविष्य को बदलने वाली योजना साबित हो सकती है। इससे स्थानीय आजीविका मजबूत होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और राष्ट्रीय कृषि संकेतकों में सुधार देखने को मिलेगा।

