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Home कृषि समाचार

“WHO की रिपोर्ट में भारत की आयुष और AI में क्रांति को मिली वैश्विक मान्यता

Fiza by Fiza
July 14, 2025
in कृषि समाचार
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“WHO की रिपोर्ट में भारत की आयुष और AI में क्रांति को मिली वैश्विक मान्यता
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने “Mapping the Application of Artificial Intelligence in Traditional Medicine” शीर्षक से एक तकनीकी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत की आयुष प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के एकीकरण को वैश्विक नवाचार के रूप में सराहा गया है। यह रिपोर्ट भारत के प्रस्ताव पर आधारित है और परंपरागत चिकित्सा में AI के उपयोग की दिशा में WHO का पहला औपचारिक रोडमैप भी प्रस्तुत करती है।

WHO ने इस रिपोर्ट में भारत को पहला देश बताया है जिसने Traditional Knowledge Digital Library (TKDL) के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत का आयुष क्षेत्र अब 43.4 अरब अमेरिकी डॉलर के बाजार में तब्दील हो चुका है, जो न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि को मिली वैश्विक पहचान

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की “AI for All” की सोच के तहत भारत ने परंपरागत चिकित्सा में AI के उपयोग को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2023 में GPAI सम्मेलन में दिए गए अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था, “हमने ऐसे सरकारी कार्यक्रम बनाए हैं जो समाज के समग्र विकास और समावेशी प्रगति के लिए AI की क्षमताओं का पूर्ण लाभ उठाने के लिए प्रेरित हैं।“

वैज्ञानिक नवाचारों का केंद्र बना भारत

आयुष और स्वास्थ्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि WHO द्वारा भारत की इन पहलों को पहचान देना इस बात का प्रमाण है कि भारत ने आधुनिक तकनीक को परंपरागत चिकित्सा के साथ जोड़कर एक नया वैश्विक मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि SAHI पोर्टल, NAMASTE पोर्टल और आयुष रिसर्च पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, भारत की वैज्ञानिक प्रतिबद्धता और नवाचार क्षमता को दर्शाते हैं।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि रिपोर्ट में भारत की कई AI-आधारित पहलें शामिल की गई हैं, जैसे कि प्रकृति आधारित मशीन लर्निंग मॉडल, आयुर्जेनोमिक्स (Ayurgenomics), और पारंपरिक उपचारों के लिए जनोम और आणविक स्तर पर अनुसंधान। इन पहलों ने न केवल भारत की चिकित्सा परंपराओं को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया है, बल्कि उन्हें वैश्विक चिकित्सा व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में भी अग्रसर किया है।

WHO ने इन नवाचारों को बताया क्रांतिकारी

WHO की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत में आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी जैसी परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों में AI का उपयोग करके नाड़ी परीक्षण, जीभ परीक्षण और प्रकृति विश्लेषण जैसे तरीकों को मशीन लर्निंग और डीप न्यूरल नेटवर्क्स से जोड़ा जा रहा है। इससे डायग्नोसिस की सटीकता बढ़ी है और व्यक्तिगत पूर्व-रोग रोकथाम संभव हुई है।

आयुर्जेनोमिक्स, एक ऐसा क्षेत्र जो आयुर्वेदिक सिद्धांतों को जीनोमिक्स के साथ जोड़ता है, AI के माध्यम से बीमारी के भविष्यवक्ता चिन्हों की पहचान और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सलाह देने की क्षमता रखता है। यह पहल वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण क्रांति मानी जा रही है।

डिजिटल चिकित्सा का वैश्विक मॉडल बना भारत

WHO ने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने TKDL के माध्यम से परंपरागत चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने का सफल प्रयास किया है। AI आधारित उपकरणों का प्रयोग करके प्राचीन ग्रंथों का स्वचालित वर्गीकरण और विश्लेषण भी किया जा रहा है जिससे इनका उपयोग आसान और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित बन रहा है।

इसके अतिरिक्त, भारत में AI के माध्यम से दवा क्रियावली विश्लेषण, विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन, और पारंपरिक मानदंडों जैसे कि रस, गुण और वीर्य की पहचान के लिए कृत्रिम रासायनिक सेंसर का विकास हो रहा है।

वैश्विक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध भारत

रिपोर्ट में भारत के द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन परामर्श सेवाओं, आयुष चिकित्सकों के बीच डिजिटल साक्षरता, और मुख्यधारा स्वास्थ्य सेवा के साथ एकीकृत प्रणालियों के निर्माण की भी सराहना की गई है।

आयुष मंत्रालय ने WHO की इस मान्यता का स्वागत करते हुए इसे भारत के परंपरागत चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है और कहा कि भारत उत्तरदायी नवाचार और वैश्विक सहयोग के लिए WHO के दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।

 

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