केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति के सदस्य शिवराज सिंह चौहान ने तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित आईसीएआर-गन्ना प्रजनन संस्थान (ICAR-Sugarcane Breeding Institute) का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में चल रहे कपास और गन्ना अनुसंधान, उन्नत किस्मों, कृषि यंत्रों, ड्रोन टेक्नोलॉजी, और कपास से बने उत्पादों का गहन अवलोकन किया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों से विभिन्न शोध परियोजनाओं की जानकारी ली और भारत में टिकाऊ कृषि की दिशा में चल रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की कृषि को आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी समन्वय अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने विशेष रूप से कपास क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान पर गंभीरता से चर्चा करते हुए कहा:
“आइए, बहुत गंभीरता से विचार-विमर्श करें और कपास के लिए एक ठोस रोडमैप बनाएं।”
उन्होंने “वन नेशन, वन एग्रीकल्चर, वन टीम” की अवधारणा को दोहराते हुए कहा कि भारत की कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सभी संस्थानों, वैज्ञानिकों, किसानों और नीति-निर्माताओं को एक टीम की तरह मिलकर कार्य करना होगा।
इस दौरान उन्होंने ड्रोन तकनीक, मशीनीकरण, और जैविक उत्पादों के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि आधुनिक तकनीक से जुड़कर ही किसान की आमदनी को दोगुना किया जा सकता है।
संस्थान के निदेशक और प्रमुख वैज्ञानिकों ने केंद्रीय कृषि मंत्री को विभिन्न शोधों की प्रगति, फील्ड ट्रायल्स और किसानों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गन्ना और कपास की उन्नत किस्में न केवल उत्पादन बढ़ा रही हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के अनुकूल भी हैं।
इस अवसर पर कई कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, छात्र और स्थानीय किसान भी उपस्थित रहे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सभी को टीम भावना से काम करने और भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

