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Home कृषि समाचार

खरीफ सीजन में बढ़ती खाद की मांग के बीच लापरवाही उजागर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप

Fiza by Fiza
July 11, 2025
in कृषि समाचार
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खरीफ सीजन में बढ़ती खाद की मांग के बीच लापरवाही उजागर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप
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खरीफ सीजन 2025 के साथ देशभर में खाद की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं उत्तर प्रदेश से आई एक लापरवाही भरी घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ थाना क्षेत्र स्थित रेलवे माल गोदाम में खुले आसमान के नीचे रखी हजारों बोरी यूरिया भारी बारिश में भीग गईं। यह घटना तब सामने आई जब इन बोरियों को एक मालगाड़ी से उतारा जा रहा था।

बारिश के दौरान उर्वरक की बोरियां भीगती रहीं और वहां मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।

प्रशासन की सफाई और खामोशी
मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि कुछ बोरियां भीगी हैं, जिन्हें समितियों पर सूखाकर उपयोग लायक बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

देशभर में खाद की बढ़ती मांग, संकट गहराने की आशंका
खरीफ सीजन में देशभर में कुल 362.60 लाख मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, लेकिन अब तक केवल 213.38 लाख मीट्रिक टन खाद ही उपलब्ध हो सकी है (30 जून 2025 तक के आंकड़े)।

  • यूरिया की मांग सबसे अधिक 185.40 लाख मीट्रिक टन है, लेकिन उपलब्धता महज 93.90 लाख टन ही है।

  • डीएपी (DAP) की मांग 56.99 लाख टन, जबकि उपलब्धता मात्र 20.87 लाख टन रही।

  • एमओपी (MOP) की 11.13 लाख टन जरूरत के मुकाबले 9.70 लाख टन उपलब्ध है।

  • एनपीके (NPK) की 76.51 लाख टन मांग पर 58.73 लाख टन की उपलब्धता।

  • एसएसपी (SSP) की 32.57 लाख टन मांग के मुकाबले 30.17 लाख टन उपलब्ध है।


कृषि विशेषज्ञों की चिंता


विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह से उर्वरकों की बर्बादी होती रही और मांग के मुताबिक आपूर्ति नहीं हुई, तो खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। खाद की कमी से उत्पादन घटने की आशंका भी जताई जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खाद जैसी महत्वपूर्ण कृषि संसाधन की हैंडलिंग में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। यह घटना केवल खाद की बर्बादी नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों और मेहनत पर पानी फेरने जैसा है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

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