बिजरोल रोड स्थित जय बजरंग प्रतिष्ठान में राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (मैनेज), हैदराबाद एवं राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (National Bee Board) की संयुक्त योजना के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय “वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन” प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का 8 जुलाई 2025 को विधिवत समापन हुआ। इसके साथ ही 9 जुलाई 2025 को तीसरे बैच का शुभारंभ भी उत्साहपूर्वक किया गया।
दूसरे बैच का समापन समारोह
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि संजीब रॉय, निदेशक, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), मेरठ मंडल ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण किट प्रदान किए। विशिष्ट अतिथि राजीव बालियान, चेयरमैन, जीत खादी ग्रामोद्योग, और विनीत कुमार भी समारोह में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम समन्वयक जे.के. श्योराण ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। समापन समारोह में प्रोग्राम मैनेजर वसीम अहमद ने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के अनुभवों पर फीडबैक प्राप्त किया और भविष्य में मधुमक्खी पालन के विस्तार के लिए प्रेरित किया।
तीसरे बैच का शुभारंभ
आज 9 जुलाई को तीसरे बैच के प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि वीरेंद्र प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य, जनता वैदिक कॉलेज, बड़ौत, के कर-कमलों से हुआ। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में राजीव बालियान, चेयरमैन, जीत खादी ग्रामोद्योग सोसाइटी, और ध्वज बालियान, चेयरमैन, किसान विकास उद्योग संस्थान, भी उपस्थित रहे।
प्रो. सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के व्यावसायिक और आर्थिक लाभों के बारे में अवगत कराया और बताया कि शहद उत्पादन किसानों की आय में वृद्धि का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। वहीं श्री ध्वज बालियान ने मधुमक्खी की प्रमुख नस्ल एपिस मेलिफेरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जो कि पालने योग्य नस्ल है और उच्च गुणवत्ता तथा अधिक मात्रा में शहद उत्पादन के लिए जानी जाती है।
इस बैच में प्रियंका इनानिया, जुही असवानी, आरोहित पटेल, आकाश सहारावत सहित 25 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। कार्यक्रम समन्वयक जे. के. श्योराण ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए प्रशिक्षण की सफलता की कामना की।
प्रशिक्षण का उद्देश्य
इस प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, किसानों, और इच्छुक उद्यमियों को वैज्ञानिक विधियों से मधुमक्खी पालन का व्यावहारिक ज्ञान देना है ताकि वे शहद उत्पादन के माध्यम से स्वरोजगार और अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकें। प्रशिक्षकों द्वारा मधुमक्खी प्रबंधन, बॉक्स संचालन, रोग नियंत्रण, मौसमी देखभाल, और शहद/मोम की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग जैसे विविध विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

