कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), सिपाहीजला, काउ (CAU-I), लटियाचेर्रा, त्रिपुरा द्वारा बिशालगढ़ ब्लॉक के पथालिया गांव में “सेसम (तिल) पर फील्ड डे” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने, कीट प्रबंधन के एकीकृत उपायों को अपनाने तथा क्षेत्र में तिल की खेती का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम प्रो. थ. रोबिंद्रो सिंह, प्रो. दीपक नाथ, डॉ. टी. मतौलेबी चानू (डिप्टी डायरेक्टर, विस्तार शिक्षा), प्रो. फ. रंजीत शर्मा (डायरेक्टर, विस्तार शिक्षा, CAU इम्फाल) एवं डॉ. अमूल्य कुमार मोहंती (डायरेक्टर, ICAR-ATARI, जोन-VII, उमियम) के तकनीकी मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को डॉ. अनुपम मिश्रा, कुलपति, CAU इम्फाल के दिशा-निर्देश और डॉ. अरुण भाई पटेल, डीन, कॉलेज ऑफ फिशरीज, लेम्बुचेर्रा के मार्गदर्शन में तथा डॉ. शतभिषा सरकार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, KVK सिपाहीजला की देखरेख में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. उत्कल डे (एसएमएस, प्लांट प्रोटेक्शन) ने तिल की वैज्ञानिक खेती, प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान और IPM (एकीकृत कीट प्रबंधन) की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. शतभिषा सरकार ने तिल की खेती से मृदा स्वास्थ्य में सुधार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों से तिल की खेती के रकबे को बढ़ाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने मधुमक्खी पालन जैसे वैकल्पिक कृषि उद्यमों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया, जिससे किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में लगभग 40 किसान, महिला किसान एवं ग्रामीण युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने वैज्ञानिक तिल उत्पादन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और विशेषज्ञों से अपनी समस्याओं के समाधान प्राप्त किए।पथालिया गांव के एक प्रगतिशील किसान श्री कनाई सरकार ने बताया कि KVK सिपाहीजला के मार्गदर्शन में तिल की अच्छी पैदावार की उम्मीद है। एक हेक्टेयर भूमि से लगभग 900 से 1000 किलोग्राम तिल उत्पादन होने की संभावना है।
इस सफल कार्यक्रम का समन्वय डॉ. उत्कल डे ने किया। यह आयोजन किसानों के बीच वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

